इंदौर। दलाल बाग में आयोजित विशाल धर्मसभा में राष्ट्रसंत राजकीय अतिथि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने जीव मात्र के अस्तित्व, कर्मों के प्रभाव और धर्म के संस्कारों पर प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने पेड़-पौधों सहित सभी जीवों को जीने का अधिकार दिया है और प्रत्येक जीव जीना चाहता है।
सभी जीवों को जीने की चाह
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य हो या पेड़-पौधे, सभी जीवन चाहते हैं। विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करने लगा है कि पेड़-पौधों में जीवन होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पेड़ के पास कुल्हाड़ी लेकर जाने पर उसमें भी कंपन जैसी प्रतिक्रिया दिखाई देती है। जीवन का स्वभाव ही जीने की आकांक्षा है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जो जीवन मिला है, उससे अच्छी कोई जिंदगी नहीं हो सकती। इसलिए जीवन को व्यर्थ की चिंता और मिथ्या दृष्टि में न गंवाकर आत्मकल्याण एवं धर्म के मार्ग पर लगाना चाहिए।
कर्म से बड़ा न कोई शत्रु, न मित्र
मुनिश्री ने कर्म सिद्धांत को समझाते हुए कहा कि संसार में सबसे बड़ा बैरी स्वयं के द्वारा किए गए कर्म हैं। अपने कर्म से बड़ा न कोई शत्रु है और न कोई मित्र। इसलिए संसार से डरने की अपेक्षा प्रत्येक कार्य करते समय अपने कर्मों के परिणाम से डरना चाहिए और अच्छे-बुरे का विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान वीतराग हैं। उनसे डरने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उनके बताए मार्ग का अवलंबन लेकर मनुष्य अपने कर्मों का क्षय कर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
माता-पिता और गुरु के सामने झूठ न बोलें
मुनिश्री ने कहा कि माता-पिता और गुरु के सामने कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। यदि कोई गलत कार्य हो जाए तो उनके सामने सत्य स्वीकार कर क्षमा मांग लेनी चाहिए। सत्य स्वीकार करने से व्यक्ति की दृष्टि में उसका सम्मान बढ़ता है और सुधार का मार्ग खुलता है।
उन्होंने कहा कि धर्मोपदेश का उद्देश्य केवल पहले से सात्विक लोगों को संबोधित करना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों को भी सुधार की दिशा देना है, जिन्हें अपने जीवन में बुरी आदतों को छोड़ने की आवश्यकता है।
बच्चों को मंदिर दर्शन की प्रेरणा दें
मुनिश्री ने कहा कि धर्म को केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। बच्चों को मंदिर दर्शन और धर्म संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि एक बच्चा धर्म से जुड़ता है तो उसका प्रभाव आने वाली कई पीढ़ियों तक दिखाई दे सकता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को धर्म के संस्कार दें और स्वयं भी धर्मात्मा बनें, ताकि उनके बाद भी धर्म की प्रभावना निरंतर बनी रहे।
‘सुधा का सागर’ पर लिखित परीक्षा 9 अगस्त को
सामाजिक संसद के अध्यक्ष एवं चातुर्मास कमेटी के आनंद गोधा ने बताया कि राष्ट्रसंत तीर्थ चक्रवर्ती मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के विराट व्यक्तित्व पर आधारित पुस्तक ‘सुधा का सागर’ पर लिखित परीक्षा का आयोजन रविवार 9 अगस्त को किया जाएगा। प्रतियोगिता वर्णी श्री गंभीर सागर जी महाराज के निर्देशन में आयोजित होगी।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को 5 से 16 वर्ष तथा 17 से 80 वर्ष की आयु वर्ग में विभाजित किया गया है। दोनों आयु वर्गों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों के साथ सात्वना पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।
सपना, मनीष गोधा, रानी-अशोक दोषी, नवीन गोधा, आकाश कोयला, हर्ष जैन, धर्मेंद्र सिमकेम सहित समिति के प्रमुखजनों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से प्रतियोगिता में भाग लेने का आह्वान किया।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की महापूजा
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री दिगंबर जैन जावरा वाला मंदिर, पलासिया महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। इसके बाद संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की महापूजा की गई। आचार्यश्री के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन भी किया गया।
जिला जज कुलदीप जैन ने लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर इंदौर जिला जज कुलदीप जैन ने परम पूज्य राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर समिति की ओर से समाजसेवी अशोक, रानी डोसी, सपना, मनीष गोधा, सुची, नवीन गोधा, आकाश कोयला, आनंद गोधा, हर्ष जैन, धर्मेंद्र सिमकेम सहित अन्य प्रमुखजनों ने जिला जज कुलदीप जैन का सम्मान किया।
शांतिधारा एवं धार्मिक आयोजन
कार्यक्रम का संचालन सोनाली जैन एवं मुक्ता जैन ने किया। शांतिधारा विवेक जैन, मुकेश जैन एवं देवेंद्र जैन परिवार द्वारा की गई। आयोजन में श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त किया।
धर्म संस्कारों से पीढ़ियां होंगी संस्कारित
मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रेरणा देते हुए कहा कि धर्म को केवल स्वयं तक सीमित न रखें, बल्कि परिवार और नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। बच्चों में मंदिर दर्शन, सत्य, संयम और सदाचार के संस्कार विकसित करने से धर्म की प्रभावना निरंतर आगे बढ़ेगी




