इंदौर। मैं अच्छा हूं और सारी दुनिया बुरी है, मेरे से अच्छा कोई हो नहीं सकता और कर भी नहीं सकता, जिसके मन में ऐसा भाव आ जाए उसका पतन निश्चित है। सारे जगत को बुरा कहने वाले तुम होते कौन हो? यह बात मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने सोमवार को दलाल बाग स्थित विद्या सुधा सत्संग मंडप में कहीं। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मासिक धर्म सभा में मुनि श्री संबोधित कर रहे थे।

मुनि श्री ने कहा कि तुम स्वयं को अच्छा तभी कह सकते हो जब सारे जगत के लोग और तुम्हारे माता-पिता तुम्हें अच्छा कहें,माने और तुम्हारी प्रशंसा करें लेकिन, स्वयं अपने मुंह से मियां मिट्ठू बनकर आत्म प्रशंसा और परनिंदा कर अहंकारी मत बनो। धर्म सभा में तीर्थ चांदखेड़ी के अध्यक्ष हुकुमचंद काका, अशोक डोषी, आनंद नवीन गोधा, हर्ष जैन, आलोक आकाश कोयला परिवार, भूपेंद्र जैन, मयंक जैन, राकेश गोहिल, अक्षय कासलीवाल, रानी डोसी, सोनाली बगड़िया आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे।