संपूर्ण भारतवर्ष में ज्ञान की धारा युवा विद्वानों से व्यवहृत है। इसका संपूर्ण श्रेय स्वर्गीय रतन लाल बैनाड़ा गुरु को जाता है, जिनका आज जन्म दिवस है। उनके कारण ही सन् 1996 के उस ऐतिहासिक चातुर्मास ने जैन दर्शन की आधारशिला पुनः स्थापित की जिसकी परम प्रेरणा स्वयं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज हैं। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट...
इंदौर। संपूर्ण भारतवर्ष में ज्ञान की धारा युवा विद्वानों से व्यवहृत है। इसका संपूर्ण श्रेय स्वर्गीय रतन लाल बैनाड़ा गुरु को जाता है, जिनका आज जन्म दिवस है। उनके कारण ही सन् 1996 के उस ऐतिहासिक चातुर्मास ने जैन दर्शन की आधारशिला पुनः स्थापित की जिसकी परम प्रेरणा स्वयं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज हैं। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने जैन दर्शन के अध्ययन-अध्यापन की पुनः जागृति हेतु जयपुर एवं संपूर्ण भारत की समाज को आंदोलित करने वाला एक प्रवचन दिया और इस प्रवचन के फलस्वरूप जयपुर के जैन समाज ने इस महत्वपूर्ण कार्य को साकार करने हेतु आश्वासन के साथ अपनी धनसंपदा के स्रोत श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान की स्थापना कर सार्थक कर दिया।

पूज्य श्री के मन में एक विचार आया कि संस्था तो खड़ी हो सकती है किंतु संस्था में छात्रों के लिए अध्यापन कार्य कौन करेगा? चूंकि पूज्य सुधा सागर जी महाराज जयपुर आने से पूर्व आगरा नगर से होते हुए आए थे। अतः उनके मन में पंडित रतन लाल जी के प्रति, उनकी ज्ञान पिपासा और ज्ञान के अगाध भंडार को देखते हुए सर्वप्रथम उन्हें स्मरण करती है और यह संदेश आदरणीय बैनाड़ा जी के समक्ष पहुंचता है।

जैनधर्म-दर्शन के अध्ययन अध्यापन के लिए समर्पित की भूमि

उस आज्ञा का पालन करते हुए वे पूज्य श्री के दर्शन करने शीघ्र ही जयपुर पधारते हैं और ऐसे सुंदर एवं महत्वपूर्ण कार्य के लिए वे सहर्ष स्वीकृति प्रदान करते हैं। इसके साथ ही श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर संघी जी की सांगानेर में स्थित 5 एकड़ की भूमि को जैनधर्म-दर्शन के अध्ययन अध्यापन हेतु समर्पित करने का भाव सांगानेर समाज ने व्यक्त किया और सांगानेर की उस भूमि पर भव्य संस्था का निर्माण श्री गणेश राणा जी की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ।निर्माणाधीन संस्था में प्रवेश ले चुके छात्रों के लिए तत्कालीन व्यवस्था श्री संघी जी मंदिर में हुई और यहां पर पंडित रतन लाल जी ने एवं महेश भैया आदि के सहयोग से जैन धर्म दर्शन को पढ़ाने का उत्तम कार्य प्रारंभ किया।

रजत जयंती वर्ष का आयोजन 

आज इस संस्था को 25 वर्ष हो चुके हैं और इसी उपलक्ष्य में संपूर्ण भारतवर्ष में रजत जयंती वर्ष का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत संपूर्ण भारत में शिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है और भी अन्य अनेक धर्म वृद्धि के कार्य सतत चल रहे हैं। आदरणीय बैनाड़ा जी की कक्षा को पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र आज उनके वियोग में उन्हें स्मरण करता हुआ दुख का अनुभव कर रहा है किंतु अपने गुरु के प्रति एक आदर भाव भी मन में उत्पन्न होता है कि हमारा ऐसा सौभाग्य था कि हम इस सदी के श्रेष्ठतम गृहस्थ विद्वान से जिनवाणी को सुन सके और अब समय के साथ उसे गुनने की भी कोशिश कर रहे हैं। उनसे पढ़े हुए सभी छात्रों और समाज के लोगों के साथ उनके जीवन की अनेक सुनहरी यादें होंगी। आप सभी उन यादों को साझा करके उनके व्यक्तित्व से सभी को अवगत कराएं। आज़ इस पुण्य दिवस पर इंदौर दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, मंत्री डॉ जैनेन्द्र जैन, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, सुशील पांड्या, हंसमुख गांधी, पंडित विपिन कुमार जैन शास्त्री आदि उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।