मुरैना। ग्रहों की चाल, राशि परिवर्तन, युति, प्रतियुति तथा परस्पर दृष्टि को ज्योतिष शास्त्र में मानव जीवन के साथ-साथ पृथ्वी के चराचर जगत पर प्रभाव डालने वाला माना गया है। इन्हीं ग्रह स्थितियों के आधार पर समय के शुभ-अशुभ संकेतों का आकलन किया जाता है। सितम्बर माह में कई महत्वपूर्ण ग्रह परिवर्तन हो रहे हैं, जिन्हें ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार 2 सितम्बर को शुक्र कन्या राशि से अपनी ही राशि तुला में प्रवेश कर चुके हैं। 7 सितम्बर को बुध सिंह राशि से कन्या राशि में पहुंचे हैं। 12 सितम्बर को बुध पश्चिम दिशा में उदय होंगे, जबकि 26 सितम्बर को कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं 18 सितम्बर को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ज्योतिष में मंगल की नीच राशि माना जाता है। मंगल और गुरु की युति तथा अन्य ग्रहों के साथ बनने वाले संबंधों के कारण यह अवधि महत्वपूर्ण रहेगी

सूर्य-शनि की प्रतियुति

डॉ. जैन ने बताया कि 17 सितम्बर से सूर्य कन्या राशि में और शनि मीन राशि में रहेंगे। दोनों ग्रह एक-दूसरे के आमने-सामने होने से सूर्य-शनि की प्रतियुति बनेगी। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य सत्ता, शासन, प्रशासन, नेतृत्व और सरकार का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि शनि श्रमिक वर्ग, जनसामान्य, न्याय, संघर्ष तथा व्यवस्था में आने वाली रुकावटों का कारक माना जाता है। ऐसे में सितम्बर के उत्तरार्ध में शासन-प्रशासन और राजनीतिक क्षेत्र में दबाव तथा मतभेद बढ़ने की संभावना ज्योतिषीय रूप से व्यक्त की जा रही है। सत्ता पक्ष को विरोध, जन असंतोष अथवा कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है और सरकार से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों पर भी दबाव बन सकता है।

मंगल-गुरु की युति से बढ़ सकता है तनाव

उन्होंने बताया कि 18 सितम्बर से मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और गुरु के साथ युति बनाएंगे। ज्योतिष में मंगल को साहस, सेना, युद्ध, अग्नि, भूमि, तकनीक और ऊर्जा का कारक माना जाता है, जबकि गुरु ज्ञान, वित्त, विस्तार और व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। ज्योतिषीय आकलन के अनुसार मंगल-गुरु की युति के कारण राजनीतिक एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आक्रामकता बढ़ सकती है। सीमा विवादों में तनाव और सैन्य गतिविधियों में वृद्धि के संकेत माने जा रहे हैं। अमेरिका-ईरान सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से चल रहे तनावों में भी पुनः तेजी आने तथा अन्य देशों के प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

प्राकृतिक घटनाओं के प्रति सतर्कता जरूरी

डॉ. जैन के अनुसार मंगल के नीच राशि में आने तथा शनि और राहु के साथ बनने वाले ग्रह संबंधों को देखते हुए ज्योतिषीय दृष्टि से भूकंप, भूस्खलन, तेज वर्षा, बाढ़, अग्निकांड तथा मौसम में अचानक परिवर्तन जैसी घटनाओं के प्रति सावधानी का समय माना जा सकता है। विशेष रूप से पर्वतीय और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सितम्बर के उत्तरार्ध से अक्टूबर तक सतर्कता रखना उचित रहेगा। हालांकि प्राकृतिक घटनाओं का वास्तविक पूर्वानुमान वैज्ञानिक मौसम, भू-विज्ञान एवं आपदा प्रबंधन संस्थाओं के आंकड़ों और चेतावनियों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

महंगाई और बाजार पर भी पड़ सकता है प्रभाव

ज्योतिषाचार्य डॉ. जैन ने कहा कि मंगल-गुरु की युति तथा सूर्य-शनि की प्रतियुति का प्रभाव आर्थिक क्षेत्र में भी दिखाई देने की संभावना ज्योतिषीय रूप से मानी जा रही है। ईंधन, धातु, खाद्यान्न, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की कुछ वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। सोना-चांदी सहित अन्य धातुओं में भी अचानक तेजी-मंदी के दौर देखने को मिल सकते हैं।

पशु एवं मानव स्वास्थ्य के प्रति सावधानी

उन्होंने बताया कि ज्योतिषीय परंपरा में मंगल-शनि के नवम-पंचम तथा मंगल-राहु के षडाष्टक संबंधों को रोग, संक्रमण, चोट, दुर्घटना और अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जोड़ा जाता है। इसलिए इस अवधि में मनुष्य एवं पशुओं में मौसमी रोगों तथा संक्रमण संबंधी समस्याओं के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

बारह राशियों पर प्रभाव

मेष-कार्यक्षेत्र में दबाव बढ़ सकता है। धन संबंधी मामलों में जल्दबाजी से बचें। पारिवारिक विवादों से दूर रहना लाभदायक रहेगा।

वृषभ-आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव रह सकता है। नौकरी और व्यवसाय में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। स्वास्थ्य के प्रति सावधानी रखें।

मिथुन-व्यापार में परिवर्तन के अवसर मिलेंगे। यात्रा बढ़ सकती है। निवेश के संबंध में जल्द निर्णय लेने से बचें।

कर्क-मंगल आपकी राशि में नीच अवस्था में रहेंगे और गुरु के साथ युति बनाएंगे। मानसिक तनाव, खर्च और पारिवारिक मतभेद से बचें। मेहनत के बाद सफलता मिलने के योग हैं।

सिंह-कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ सकती है, लेकिन अधिकारियों से मतभेद से बचें। आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं।

कन्या-सूर्य और बुध के प्रभाव से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। नई योजनाओं पर कार्य होगा। स्वास्थ्य और खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

तुला-शुक्र अपनी राशि में होने से संबंधों, आकर्षण और आर्थिक मामलों में राहत मिल सकती है। व्यापार में लाभ के अवसर बनेंगे।

वृश्चिक-मंगल का राशि परिवर्तन मिश्रित परिणाम दे सकता है। भूमि, संपत्ति और वाहन संबंधी मामलों में सावधानी रखें। क्रोध से नुकसान हो सकता है।

धनु-गुरु का प्रभाव शिक्षा, ज्ञान और आर्थिक मामलों में सहायक रह सकता है, लेकिन कार्यक्षेत्र में दबाव बना रहेगा। निवेश सोच-समझकर करें।

मकर-शनि का प्रभाव जिम्मेदारियां बढ़ा सकता है। पारिवारिक एवं आर्थिक मामलों में धैर्य रखें। पुराने कार्यों को पूरा करने का समय है।

कुंभ-नौकरी और व्यवसाय में परिवर्तन के संकेत मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होगा। अनावश्यक विवाद से बचें।

मीन-शनि आपकी राशि में रहेंगे और सूर्य के साथ प्रतियुति बनेगी। मानसिक तनाव एवं जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। धैर्य और अनुशासन से परिस्थितियों को संभाला जा सकता है।