महरौनी (ललितपुर)। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में 17 से 25 अक्टूबर तक आयोजित सिद्धोत्सव के दौरान धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है। मुनिश्री 108 मंगलानंद सागर महाराज एवं मुनिश्री 108 मंगलसागर महाराज के मंगल सानिध्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत के दिशा-निर्देशन में श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ जिन आराधना में जुटे हैं। प्रतिदिन हो रहे अभिषेक, पूजन, शांतिधारा, विधान और मंगल आरती से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। सिद्धोत्सव के अंतर्गत प्रतिष्ठाचार्य पं. मनीष जैन संजू एवं पं. विकास जैन के निर्देशन में विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन कराया जा रहा है। वहीं, दीक्षा जैन म्यूजिकल ग्रुप की मधुर भजन प्रस्तुतियों और संगीतमय पूजन से धार्मिक आयोजन में विशेष आकर्षण बना हुआ है। भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु जिनेंद्र भगवान की आराधना कर पुण्यार्जन कर रहे हैं।

सुबह धार्मिक अनुष्ठान, शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम

सिद्धोत्सव के दौरान प्रतिदिन प्रातःकाल भगवान का अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा की जाती है। इसके बाद मुनिश्री के मंगल प्रवचन होते हैं, जिनमें धर्म, संयम, आत्मकल्याण और जीवन में सदाचार के महत्व पर प्रकाश डाला जाता है। इसके साथ ही विधान एवं मंगल आरती के माध्यम से श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। सांध्यकालीन बेला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिद्धोत्सव में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

सवाई सिंघई परिवार कर रहा विधान की आराधना

इस धार्मिक विधान के पुण्यार्जक कुम्हैड़ी का सवाई सिंघई परिवार है। परिवार के सदस्य हेमंत सिंघई, राजेंद्री, हीरालाल, लक्ष्मी देवी, सनत, माला, प्रमोद, सरोज, आशु, पंकज, प्रमिला, आलोक, मुक्ता एवं अनुराग इंद्र-इंद्राणी के रूप में विधान में शामिल होकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर रहे हैं। आयोजन में प्रवीण, सतेंद्र, धीरेंद्र, पंकज, प्रवीण, शाश्वत, अविरल एवं वीरचंद्र नैकोरा सहित अन्य श्रद्धालु सहयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही अतिशय क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य एवं कर्मचारी भी व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सांस्कृतिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर

नवागढ़ में आयोजित यह सिद्धोत्सव श्रद्धालुओं के लिए धर्माराधना, आध्यात्मिक चिंतन और सांस्कृतिक सहभागिता का महत्वपूर्ण अवसर बना हुआ है। 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालु जिनेंद्र भगवान की आराधना कर रहे हैं।