परिवहन नगर स्थित श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर में सिद्ध चक्र विधान का तीसरा दिन बड़ी श्रद्धा, उमंग और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में सौधर्म इंद्र रूप में विशेष सहभागिता, प्रवचन और सम्मान समारोह प्रमुख आकर्षण रहे। — पढ़िए श्रीफल साथी रेखा जैन की रिपोर्ट

“जहाँ श्रद्धा हो, वहाँ सिद्धि अपने आप उतर आती है… और परिवहन नगर जैन मंदिर में आज वही दृश्य देखने को मिला।”

परिवहन नगर स्थित श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर, इंदौर में चल रहे सिद्ध चक्र विधान का तीसरा दिन आज पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के पावन सान्निध्य ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।श्रीफल गौरव दिवस—विशेष सहभागिता

आज का आयोजन श्रीफल गौरव दिवस के रूप में मनाया गया। इसमें कमलेश–टीना जैन परिवार ने सौधर्म इंद्र रूप में विशेष सहभागिता निभाकर कार्यक्रम को और भी भव्य बनाया।

अभिषेक और शांतिधारा से हुआ शुभारंभ

सुबह विधान की शुरुआत जिनेंद्र भगवान के अभिषेक और शांतिधारा से हुई। इसका सौभाग्य दीपक–सुनयना जैन परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य अभिनंदन सागरजी एवं आचार्य वर्धमान सागरजी के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया।

मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य

अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य हसमुख गांधी, नवनीत जैन और रेखा संजय जैन को प्राप्त हुआ।

64 अर्घ्य अर्पण—विधान का प्रमुख आकर्षण

तीसरे दिन की नित्य नियम पूजा के दौरान भक्तों ने 64 अर्घ्य समर्पित किए, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्ति-रस से भर गया।

मुनिश्री का प्रेरक संदेश

प्रवचन में मुनिश्री ने कहा— “आज समाज में मंदिरों में अभिषेक-पूजन करने वालों और तीर्थ यात्रियों की कमी हो रही है। इसी कारण संस्कार और संस्कृति कमजोर पड़ रही है।”

उन्होंने आगे कहा— “धन जब धर्म से जुड़ता है तो उन्नति देता है, और बिना धर्म के वही धन विनाश का कारण बनता है।”

सम्मान समारोह और तीर्थ निर्देशिका भेंटकार्यक्रम में परिवहन समाज के अध्यक्ष नवनीत जैन और श्रेष्ठी जैन ने हसमुख गांधी का सम्मान किया। इस अवसर पर हसमुख गांधी ने मुनिश्री को तीर्थ निर्देशिका भेंट की।

“भक्ति जब भाव से जुड़ जाती है… तो हर पल विधान बन जाता है। परिवहन नगर में आज यही अध्यात्म अपनी चरम अवस्था में नजर आया।”