आगरा। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर,कलाकुंज, मारुति स्टेट में वात्सल्य सेवा समिति, कलाकुंज अवधपुरी के तत्वावधान में चल रहे 44 दिवसीय पार्श्वनाथ कल्याण स्तोत्र मंदिर विधान का पंचम दिवस रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। भगवान पार्श्वनाथ की आराधना के साथ विधान की मांगलिक एवं धार्मिक क्रियाओं का शुभारंभ हुआ। विधानाचार्य पंडित सुमेर जैन शास्त्री के निर्देशन में इंद्र-इंद्राणियों ने मंत्रोच्चार के साथ विधान की विभिन्न धार्मिक क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक कराईं। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के समक्ष पूजन-अर्चन कर धर्मलाभ अर्जित किया। विधान के दौरान भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंजायमान हो उठा और श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ आराधना में लीन नजर आए।

मधुर भजनों की स्वर लहरियों ने भक्ति में किया लीन

विधान के दौरान संगीतमय भक्ति कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। भक्ति गीतों और मधुर भजनों की स्वर लहरियों से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के साथ भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का सुंदर संगम दिखाई दिया। पंचम दिवस के विधान के पुण्यार्जक परिवार मन्नू विहार निवासी विवेक जैन, ज्योति जैन एवं मोक्षा जैन रहे। पुण्यार्जक परिवार की विशेष उपस्थिति में विधान की सभी धार्मिक क्रियाएं श्रद्धापूर्वक हुईं। परिवार के सदस्यों ने भगवान पार्श्वनाथ की आराधना कर विधान में सहभागिता की और पुण्यार्जन किया।

प्रतिदिन श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में हो रहे शामिल

इस अवसर पर रविन्द्र जैन, राजीव जैन,आशु जैन भगत,विवेक जैन,आगम जैन,मीडिया प्रभारी शुभम जैन,रागिनी जैन, उपासना जैन, पुष्पा जैन, रतिया जैन, सुनीता जैन, समस्त वात्सल्य सेवा समिति एवं कलाकुंज मंदिर समिति के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन, पूजन एवं विधान में सहभागिता कर धर्मलाभ लिया। 44 दिवसीय इस धार्मिक आयोजन को लेकर समाजजनों में लगातार उत्साह बना हुआ है। मंदिर परिसर में प्रतिदिन श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में भी विधान की विभिन्न धार्मिक क्रियाएं श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न होंगी। धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में संस्कार, एकता और आध्यात्मिक चेतना का संचार हो रहा है।