कुचामन सिटी में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत श्रद्धालुओं ने पाप दहन के 128 अर्घ्य समर्पित किए। कलशाभिषेक, शांतिधारा एवं विविध पूजनों के माध्यम से धर्म आराधना सम्पन्न हुई। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।
कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, डीडवाना रोड, कुचामन सिटी में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं अमन-चैन की मंगलकामना से आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत गुरुवार को प्रातःकाल भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुई।श्रावक परिवारों को मिला शांतिधारा का सौभाग्य

कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी तेजकुमार–शकुंतला, पंकज–मंजू, प्रवीण बड़जात्या परिवार, विमलकुमार–नवीन–पदमा–दर्शन पाटोदी परिवार तथा पदमचंद भरतिया परिवार (सीकर) को प्राप्त हुआ। सभी ने भक्तिभाव से शांतिधारा कर धर्मलाभ अर्जित किया।

अष्टान्हिका पर्व का बताया महत्व

लालचंद पहाड़िया एवं अमित पाटोदी ने बताया कि अष्टान्हिका महापर्व वर्ष में तीन बार—कार्तिक, फाल्गुन एवं आषाढ़ मास में आता है। इन पावन अवसरों पर नंदीश्वर द्वीप विधान एवं सिद्धचक्र विधान का विशेष महत्व है, जिनके माध्यम से श्रद्धालु आत्मशुद्धि एवं धर्माराधना का पुण्य अर्जित करते हैं।

128 अर्घ्यों के साथ हुई पाप दहन आराधना

सुरेश पांड्या एवं माणकचंद काला ने बताया कि कलशाभिषेक के पश्चात देव-शास्त्र पूजन, पंचमेरु पूजन, नंदीश्वर द्वीप पूजन तथा मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की पूजा सम्पन्न हुई। इसके उपरांत सिद्धचक्र विधान में पाप दहन के 128 अर्घ्य विश्व शांति एवं मंगलभावनाओं के साथ समर्पित किए गए।

श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक किया पूजन

विधान पूजन में शांति देवी, पुष्पा अजमेरा, मंजू, संतोष, चंदा देवी काला, कमला देवी, हीरामणी, कुसुम पाटोदी, मैना देवी, सुशीला, सलोचना, सरला, रेखा पहाड़िया, कमला देवी झाझरी, ज्ञानमती, आभा, विनीता, ममता, तारा देवी, सुनिता गंगवाल, बेबी कासलीवाल, राजकुमारी पाटनी, संतोष ठोल्या सहित अनेक श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया।

विश्व शांति की मंगलकामना

विधान में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता करते हुए विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं आत्मकल्याण की मंगलभावनाओं के साथ आराधना की। सम्पूर्ण वातावरण जिनभक्ति और धर्ममय उल्लास से ओत-प्रोत रहा।