श्रीफल गौरव दिवस के तहत परिवहन नगर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान के पांचवें दिन 256 अर्घ्य समर्पित किए गए। मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया। शांतिधारा, सम्मान और पत्रिका विमोचन कार्यक्रम भी हुए। संपादक रेखा जैन की रिपोर्ट

"जहाँ संस्कृति की ज्योति जलती है, वहाँ समाज अपने आप सँवर जाता है।"

इंदौर। श्रीफल गौरव दिवस के अवसर पर परिवहन नगर दिगंबर जैन मंदिर में अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में सिद्धचक्र विधान का पांचवां दिन बड़े भाव-विभोर माहौल में मनाया गया। आज 256 अर्घ्य सिद्ध भगवान को समर्पित किए गए।शांतिधारा और अर्घ्य समर्पण

कार्यक्रम की शुरुआत शांतिधारा से हुई, जिसका लाभ राजेंद्र अभिषेक जैन परिवार ने लिया। उसके बाद पूरे मंडप में श्रद्धा से अर्घ्य समर्पण किया गया।

 दीप प्रज्ज्वलन और पाद प्रक्षालन

दीप प्रज्ज्वलन मनोहर झांझरी, राजकुमार पाटोदी और अमित कासलीवाल ने किया।

मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य राजेंद्र सोनी, संजय पापड़ीवाल, ऋषभ जैन, गिरीश रारा और मनीष जैन को प्राप्त हुआ।

 रेखा जैन का स्वागत

श्रीफल गौरव दिवस की संयोजक रेखा जैन का स्वागत राजकुमार पाटोदी ने किया।

परिचय सम्मेलन पत्रिका का विमोचन

दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन द्वारा आयोजित जैन युवक–युवती परिचय सम्मेलन की पत्रिका का विमोचन अतिथियों ने किया।

इसके साथ ही अमित कासलीवाल और रितेश पाटनी ने मुनि श्री को 2026 कैलेंडर एवं जैन तिथि दर्पण भेंट किया।

तल्लीन बड़जात्या और डी.के. जैन ने विधान में श्रीफल चढ़ाकर भाव व्यक्त किए।

 अतिथियों का सम्मान

समारोह में आए अतिथियों का सम्मान समाज अध्यक्ष नवनीत जैन, कमलेश जैन, श्रेष्ठी जैन, अभिषेक जैन, दीपक जैन, संजय जैन, वर्णित जैन और रोहित जैन द्वारा किया गया।

मुनि श्री का महत्वपूर्ण संदेश

मुनि श्री पूज्य सागर महाराज ने सरल भाषा में प्रेरक संदेश देते हुए कहा—

“पहले परिचय कार्यक्रम स्वयंवर के नाम से होते थे, इसलिए आज भी इस सकारात्मक शब्द का उपयोग करना चाहिए।”

“बच्चों को संस्कार और संस्कृति से जोड़ने के लिए शिक्षण शिविर बेहद जरूरी हैं।”

“व्हाट्सएप पर बहस करके समय न गँवाएँ—अगर संस्कृति बचानी है तो सरकार और प्रशासन के सामने कागज़ पर प्रमाणिक कार्य रखें। तभी संरक्षण संभव है।”

"संस्कृति शब्दों से नहीं—दस्तावेज़, प्रयास और एकता से बचती है।"