सनावद में दिगंबर जैन समाज ने श्रुत पंचमी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया। माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई, वहीं विभिन्न जिनालयों में विधान, पूजन एवं आराधना के कार्यक्रम आयोजित हुए। पढ़िए सन्मति जैन ‘काका’ की यह रिपोर्ट
सनावद। दिगंबर जैन समाज द्वारा ज्ञान, स्वाध्याय और शास्त्र आराधना के महापर्व श्रुत पंचमी को बड़े भक्तिभाव एवं उत्साह के साथ मनाया गया। नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए तथा माँ जिनवाणी की भव्य पालकी यात्रा आकर्षण का केंद्र रही।श्रुत परंपरा का स्मरण
मीडिया प्रभारी सन्मति जैन 'काका' ने बताया कि जैन परंपरा के अनुसार भगवान महावीर के उपदेशों को उनके गणधरों ने श्रवण कर सुरक्षित रखा। बाद में गुजरात के गिरनार पर्वत स्थित चंद्रगुफा में आचार्य धरसेन से प्राप्त सैद्धांतिक देशना के आधार पर आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबलि ने ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन षट्खण्डागम ग्रंथ की रचना की। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में श्रुत पंचमी पर्व मनाया जाता है।
माँ जिनवाणी की निकली भव्य पालकी यात्राअचित्य जैन ने बताया कि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से माँ जिनवाणी को आकर्षक पालकी में विराजमान कर नगर के प्रमुख मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए और जिनवाणी माता के जयघोषों से वातावरण धर्ममय बना दिया। नगर भ्रमण के बाद यात्रा पुनः मंदिर पहुंची, जहां सामूहिक जिनवाणी पूजन सम्पन्न हुआ।
विभिन्न मंदिरों में हुए धार्मिक आयोजनश्रुत पंचमी महोत्सव के अंतर्गत श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर में श्रुत स्कंध मंडल विधान आयोजित किया गया। वहीं पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शांतिनाथ विधान का आयोजन हुआ। इसके अलावा श्री मंदर जिनालय एवं महावीर जिनालय में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रुत पंचमी पर्व मनाया गया।
शाम को हुई आरतीदिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों के बाद सायंकाल श्रीजी एवं माँ जिनवाणी की आरती की गई। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए नियमित स्वाध्याय एवं धर्म अध्ययन का संकल्प लिया।
पोदनपुरम में रजतमय जिनवाणी का अभिषेकनगर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित पोदनपुरम क्षेत्र में भी श्रुत पंचमी पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया गया। यहां परम पूज्य विदुषी आर्यिका प्रशांतमति माताजी द्वारा संकलित तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज द्वारा प्रतिष्ठित विश्व की अनूठी रजतमय माँ जिनवाणी का पंचामृत अभिषेक एवं पूजन सम्पन्न हुआ।
इस पुण्य कार्य का सौभाग्य वारिस जैन एवं संदीप जैन को प्राप्त हुआ। अभिषेक एवं पूजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और जिनवाणी माता की आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
समाजजनों की रही उल्लेखनीय सहभागिताइस अवसर पर महेंद्र मुशी, सुनील पावणा, मनोज जैन, विशाल सराफ, सरल जटाले, अभिजीत जैन, राजू जैन, हर्षित जैन, सुनील मास्टर साहब, कांतिलाल जैन, पुष्पेंद्र जैन, संजय जैन, सुधीर जैन, प्रीति जटाले, राजश्री जैन, पुष्पा जैन, गरिमा जैन, अंशिता जैन, विनीता बाकलीवाल, रेखा जैन, संगीता बाकलीवाल, नीलू जैन, मधु भूच, हीरामणी भूच, साधना जैन, सरोज जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
श्रुत पंचमी महापर्व के माध्यम से समाज ने जिनवाणी के अध्ययन, संरक्षण और ज्ञान आराधना का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।




