कुचामन सिटी। भगवान श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, डिडवाना रोड पर मुकुट सप्तमी के पावन अवसर पर उपसर्ग के विजेता भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ मनाया गया। जैन धर्म में भगवान पार्श्वनाथ का जीवन वैराग्य, तप, अहिंसा, क्षमा एवं आत्म-साधना का अत्यंत प्रेरणादायक उदाहरण है। केवलज्ञान प्राप्ति के पश्चात उन्होंने जीवों को आत्मकल्याण का मार्ग बताया। उनके उपदेशों में अहिंसा, सत्य, अचौर्य एवं अपरिग्रह का विशेष महत्व रहा। भगवान ने संसार के बंधनों से मुक्ति का मार्ग बताते हुए रत्नत्रय—सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान एवं सम्यक चरित्र को मोक्ष मार्ग का आधार बताया। भगवान पार्श्वनाथ ने शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी से निर्वाण प्राप्त किया।
शांतिधारा कर बहुमान किया
प्रातः 6:15 बजे 21 श्रावकों ने व निराहार उपवास रखकर धर्मध्यान करने करने वाले आठ छोटे-छोटे बालकों द्वारा भगवान का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात विश्व में अमन-शांति की कामना से 1008 भगवान पार्श्वनाथ की शांतिधारा कर बहुमान किया गया। पूजा एवं विधान के बाद भगवान के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में निर्माण लाड़ू श्रद्धा एवं भक्ति भाव से चढ़ाया गया।
71 बालक-बालिकाओं ने उपवास रखे
जैन धर्म में इस दिन के विशेष महत्व को देखते हुए कुचामन मे जैन समाज के 71 बालक-बालिकाओं ने उपवास रखकर पूजा पाठ कर धर्म ध्यान किया।
अध्यक्ष लालचंद पहाड़िया ने बताया कि सभी श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा, व कल्याण स्तोत्र विधान कर निर्वाण लाड़ू अर्पित किया एवं सांय काल श्री जी की भव्य आरती कि गई।बालक-बालिकाओं को पूजा-विधान अमित पाटोदी कुचामन एवं रीता गंगवाल, किशनगढ़ ने भक्ति भाव से कराया।


