अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के चातुर्मास के धर्म प्रभावना रथ के तीसरे पड़ाव के दूसरे दिन भक्तामर महामंडल विधान में अर्घ्य चढ़ाकर भगवान आदिनाथ की आराधना की गई। विधान प्रारंभ होने से पहले भगवान अभिषेक, शांतिधारा की गई। इस अवसर पर मुनि श्री ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयं को पाप से बचने के लिए स्वयं की दृष्टि बदलना होगी। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट...
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के चातुर्मास के धर्म प्रभावना रथ के तीसरे पड़ाव के दूसरे दिन भक्तामर महामंडल विधान में अर्घ्य चढ़ाकर भगवान आदिनाथ की आराधना की गई। विधान प्रारंभ होने से पहले भगवान अभिषेक, शांतिधारा की गई।
अभिषेक,शांतिधारा करने का लाभ विधान के मुख्य पुण्यार्जक अनिल, अलका, अभय, रुचिता, आरव जैन मुंबई वालो को प्राप्त हुआ। सुनील गोधा, पवन पाटोदी और संजय पापड़ीवाला ने बताया कि दूसरे दिन चार काव्य की आराधना करते हुए 224 अर्घ्य समर्पित की गई।
दो दिन कुल 448 अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान 28 अगस्त तक चलेगा। सभा में चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन अभय, रुचिता, आरव जैन द्वारा किया गया। मुनि श्री का पाद पक्षालान विनोद गंगवाल, अभय रुचिता जैन द्वारा किया गया। शास्त्र भेंट रितेश शकुंतला जैन, लाभचंद जैन द्वारा किया गया।
अपनी दृष्टि बदलेंइस अवसर पर मुनि श्री ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयं को पाप से बचने के लिए स्वयं की दृष्टि बदलना होगी। सामने वाला कुछ भी करे, हमें सकारात्मक दृष्टि से उसे देखना चाहिए क्योंकि उसके करने से हमें कुछ फर्क नहीं पड़ता बल्कि हम क्या उसे देख कर क्या सोचते हैं, इससे फर्क पड़ता है। हमें दूसरों के गुण देखना चाहिए। उसके प्रति मैत्री का भाव रखना चाहिए। उसी में हमारा भला है। कोयला काला है पर दृष्टि बदले तो वह सफेद भी दिखाई देखा।
कोयले को जला दिया जाए तो जलने बाद राख बन जाएगी, वह सफेद होगी। बस हमें भी यही करना है कि व्यक्ति के अंदर के गुणों को देखना है।
उसकी आत्मा को देखना, तभी हम अपने आप को अशुभ कर्म से बचा सकते हैं। राम ने रावण के भी गुण देखे और अपने भाई लक्ष्मण को उसे शिक्षा ज्ञान लेने भेजा।
तभी वह राम कहलाते हैं। शेर ने दो मुनियों को देख दृष्टि बदली और संयम को धारण किया तो वह शेर महावीर भगवान बन गया।
दृष्टि में यह रखो कि मेरे कारण घर को टूटने नहीं देना है तो फिर हमें सब से प्रेम, वात्सल्य से बात करेंगे।
सबके गुण ही दिखाई देंगे, न कि अवगुण। आप अब अपनी दृष्टि को बदलें और सुख, शांति और समृद्धि का जीवन बिताएं।





