मुरैना। नगर के 125 वर्ष प्राचीन श्री गोपाल दिगंबर जैन सिद्धांत संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत सप्ताह का समापन बड़े हर्ष एवं उल्लास के साथ हुआ। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान, भोपाल के तत्वावधान में आयोजित संस्कृत सप्ताह 2026 के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रौढ़ शिक्षा जिला अधिकारी भूपेंद्रसिंह घुरैया तथा जिला संस्कृत प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. नंदराम शर्मा ने विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा के महत्व से अवगत कराया। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की आधारभूत भाषा है। वेद, शास्त्र, पुराण, उपनिषद एवं भारतीय दर्शन को गहराई से समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। संस्कृत की वैज्ञानिक संरचना इसे आधुनिक समय में भी महत्वपूर्ण बनाती है।
श्रावणी उपाकर्म, वेद पूजन एवं वेद पाठ हुआ
महाविद्यालय के प्राचार्य पं. चक्रेश जैन शास्त्री ने बताया कि संस्कृत सप्ताह के प्रथम दिवस तिलक लगाकर संस्कृत दिवस की शुभकामनाएं दी गईं। द्वितीय दिवस दिनाचरण एवं संस्कृत गीत प्रतियोगिता, तृतीय दिवस सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं शैक्षणिक विषयों पर संस्कृत में व्याख्यान आयोजित किए गए। चतुर्थ दिवस श्रावणी उपाकर्म, वेद पूजन एवं वेद पाठ हुआ। पंचम दिवस विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संपर्क कर संस्कृत शिक्षण के संबंध में जानकारी दी गई। षष्ठम दिवस संस्कृत क्रीड़ोत्सव, संस्कृत प्रतियोगिता एवं संस्कृत संध्या का आयोजन किया गया। अंतिम दिवस विद्वानों के वक्तव्यों के साथ संस्कृत सप्ताह का विधिवत समापन हुआ।
संस्कृत व्याकरण के अध्ययन के लिए प्रेरित किय
समापन अवसर पर अतिथियों ने विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा एवं संस्कृत व्याकरण के अध्ययन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि संस्कृत को केवल पाठ्यक्रम का विषय न मानकर भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। अतिथियों ने विद्यार्थियों को नई दिशा देने तथा संस्कृत व्याकरण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के महामंत्री सुनील जैन भंडारी, उपाध्यक्ष प्रेमचंद जैन, कोषाध्यक्ष एडवोकेट दिनेश जैन बरैया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज जैन (बरेह वाले), सहकोषाध्यक्ष राजकुमार जैन "राजू", वैद्य राजेंद्र जैन नंदपुरा, प्राचार्य अनिल जैन, नवनीत शास्त्री, पंकज जैन, आशीष जैन, अनिल जैन, प्राचार्य पं. चक्रेश जैन शास्त्री, पं. अभिषेक जैन शास्त्री, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
संस्कृत के प्रति नई दृष्टि एवं प्रेरणा मिली
संस्था की ओर से मुख्य अतिथि भूपेंद्र सिंह घुरैया एवं डॉ. नंदराम शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को संस्कृत के प्रति नई दृष्टि एवं प्रेरणा मिली है। संस्था एवं छात्रगण ने भविष्य में भी इसी प्रकार के सहयोग एवं मार्गदर्शन की अपेक्षा व्यक्त की।





