गुण ग्राही बनें,अवगुण ग्राही नहीं मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति को गुण ग्राही बनना चाहिए अवगुण ग्राही नहीं। हमें व्यक्ति के गुण और अवगुण दोनों को देखना चाहिए। गुण इस दृष्टि से देखना चाहिए कि मुझे ऐसा गुणी बनना है और अवगुण इस दृष्टि से देखना है कि मुझे ऐसा नहीं बनना है अतःगुण ग्राही बनें, अवगुण ग्राही नहीं। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस धर्म सभा के दौरान पंडित रतनलाल जी शास्त्री, निर्मल गंगवाल, कैलाश वेद, आजाद जैन, अशोक खासगीवाला, डॉक्टर जैनेंद्र जैन, टी के वेद उपस्थित रहे। धर्म सभा का संचालन अजीत जैन ने किया।
संसार में ऐसा कोई व्यक्ति और वस्तु नहीं जिसमें गुण अवगुण ना हों - श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज

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