सनावद। वात्सल्य वारिधि आचार्य रत्न श्री वर्धमानसागर जी महाराज की प्रेरणा से विकसित नगर से तीन किलोमीटर दूर स्थित श्री क्षेत्र पोदनपुरम में नव दिवसीय मंडल विधान श्रृंखला का समापन सिद्धचक्र मंडल विधान और सामूहिक हवन के साथ हुआ।
नवरात्रि के पावन अवसर पर अंतिम दिन प्रातःकाल श्रीजी के पंचामृत अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
सिद्धचक्र मंडल विधान में 120 अर्घ्य समर्पित
अंतिम दिवस पर श्री सौभाग्यचंद, विशालकुमार एवं वारिशकुमार जैन बड़ूद परिवार ने आचार्य श्री विप्रणतसागर जी महाराज रचित श्री सिद्धचक्र मंडल विधान रचाया। विधान में कुल 120 अर्घ्य समर्पित किए गए।
श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ पंचपरमेष्ठी एवं नवपद की आराधना कर आत्मकल्याण की भावना व्यक्त की।
नवपद की प्रतीकात्मक आराधना
महेंद्र जैन मुंशी ने सिद्धचक्र महामंडल विधान का महत्व बताते हुए कहा कि जैन परंपरा में इसे श्रेष्ठ अनुष्ठानों में माना गया है। इस विधान में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु—पंचपरमेष्ठी सहित णमोकार मंत्र के नौ पदों की प्रतीकात्मक स्थापना और आराधना की जाती है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा एवं विशुद्ध भावों से की गई आराधना आत्मशुद्धि, संयम और मोक्षमार्ग की प्रेरणा प्रदान करती है।
सामूहिक हवन के साथ समापन
मंडल विधान की पूर्णाहुति के बाद सामूहिक हवन किया गया। इसके साथ नव दिवसीय मंडल विधान श्रृंखला का विधिवत समापन हुआ।
इस अवसर पर कमलचंद जटाले, सौभाग्यचंद जैन, कैलाशचंद जटाले, वारिश जैन, सुदेश जटाले, प्रत्यूष जैन, अनित जैन, संयम जटाले, प्रीति जटाले, स्वाति जैन, सावित्री बाई, भानू बाई, स्मिता जटाले, अंकिता जैन, मंजू पाटनी, सुलेखा जैन, शैफाली जैन, स्वानुभूति जटाले एवं रेणु जैन सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।
श्रीफल साथी : सन्मति जैन काका, सनावद





