सनावद। दिगंबर जैन समाज के दस दिवसीय पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के द्वितीय दिवस पर आचार्य श्री शांतिसागर-वर्धमान देशना संत निलय, बड़ा मंदिर सनावद में उत्तम मार्दव धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आराधना की गई।
सन्मति जैन ने बताया कि परम पूज्य पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के संघस्थ बाल ब्रह्मचारी संजय भैया जी के पावन सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई।
पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा से हुई शुरुआत
प्रातःकाल जिनेंद्र देव का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय पूजन के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ।
पूर्ण सुगंधित कलश करने का सौभाग्य कैलाश चंद, ललित कुमार एवं मनोज चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का पुण्यार्जन मनीष कुमार एवं आशीष चौधरी परिवार ने किया।
मंगलाचरण के बाद हुआ दीप प्रज्ज्वलन
पूजन के बाद ऋतु पांड्या ने मंगलाचरण प्रस्तुत कर धर्मसभा का शुभारंभ किया। इसके बाद भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष अरविंद कुमार जैन, कमल चंद जटाले एवं सत्येंद्र कुमार जैन ने दीप प्रज्ज्वलित किया।
‘मान-कषाय आत्मा का बड़ा शत्रु’
धर्मसभा को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारी संजय भैया ने कहा कि मार्दव धर्म का अर्थ कोमलता, विनम्रता और अहंकार का त्याग है। मान-कषाय आत्मा का बड़ा शत्रु है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने ज्ञान, धन, रूप और कुल का अभिमान नहीं करना चाहिए। विनम्र व्यक्ति ही सच्चा ज्ञानी होता है। उत्तम मार्दव धर्म व्यक्ति को अहंकार छोड़कर सहजता और विनम्रता की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आज मनेगा आचार्य वर्धमान सागर का 77वां अवतरण दिवस
सन्मति जैन ने बताया कि शुक्रवार, 18 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल सप्तमी के अवसर पर नगर गौरव वात्सल्य वारिधि आचार्य रत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 77वां अवतरण दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
दोपहर में ब्रह्मचारी संजय भैया के निर्देशन में विनयांजलि सभा एवं सामूहिक पूजन होगा। इसके बाद प्रभावना वितरण किया जाएगा।
सायंकाल श्रीजी की आरती, भक्ति एवं प्रवचन के साथ द्वितीय दिवस के कार्यक्रम संपन्न हुए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।




