सहारनपुर। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन गुरुवार को सकल जैन समाज ने उत्तम मार्दव धर्म श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया। नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में प्रातःकाल जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, षोडश कारण एवं उत्तम मार्दव धर्म की पूजा के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए।

श्रावक-श्राविकाओं ने स्वाध्याय एवं धर्म चर्चा के माध्यम से मार्दव धर्म के स्वरूप को समझा और जीवन में मान, अभिमान एवं अहंकार का त्याग कर विनम्रता अपनाने की भावना व्यक्त की।

विभिन्न जैन मंदिरों में हुई विशेष आराधना

परमाउंट स्थित जैन मंदिर, खजांची जी दीपावली बाजार, पुराना हलवाई हट्टा स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर तथा टोली संगियान जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं विशेष पूजन किया। मंदिरों में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में समाज के श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की।

टोली संगियान जैन मंदिर में स्वाध्याय और धर्म चर्चा

टोली संगियान जैन मंदिर में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं विधि-विधान से उत्तम मार्दव धर्म की पूजन की गई। इसके बाद स्वाध्याय एवं धर्म चर्चा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने मार्दव धर्म के व्यावहारिक स्वरूप पर चिंतन किया।

इस अवसर पर चौधरी अजित जैन, कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन, मंत्री अनीश जैन, प्रबंधक पंकज जैन, मोहित जैन, अतुल जैन, रजत जैन, मयूर जैन, रजत जैन टिंकू, ऋषभ जैन नोनू, प्रियंका जैन, गीता जैन, रविंद्र जैन, अरविंद जैन, अनुज जैन टिनी, आकृति जैन, पारुल जैन, प्रेरणा जैन और चांदनी जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे

‘वास्तविक महानता बाहरी वैभव में नहीं’

जैन दर्शन के अनुसार उत्तम मार्दव धर्म मान, अभिमान और अहंकार का त्याग कर विनम्रता एवं सरलता को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देता है। धन, पद, प्रतिष्ठा, ज्ञान, रूप अथवा कुल का अहंकार आत्मकल्याण के मार्ग में बाधक माना गया है। मार्दव धर्म का संदेश है कि वास्तविक महानता बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि नम्र व्यवहार, मृदु वाणी और सरल स्वभाव में है।

‘प्रत्येक जीव के प्रति सम्मान और मैत्री का भाव रखें’

विश्व जैन संगठन, सहारनपुर के अध्यक्ष अरिहंत जैन एडवोकेट ने कहा कि “उत्तम मार्दव धर्म हमें अपने भीतर के अहंकार को पहचानकर उसका त्याग करने तथा प्रत्येक जीव के प्रति सम्मान और मैत्री का भाव रखने की प्रेरणा देता है।” उन्होंने कहा कि दशलक्षण महापर्व के दसों धर्मों को दैनिक जीवन एवं व्यवहार में उतारा जाए तो परिवार और समाज में प्रेम, सद्भाव एवं शांति की भावना को और मजबूत किया जा सकता है।

परमाउंट और खजांची जी मंदिर में भी उमड़े श्रद्धालु

खजांची जी जैन मंदिर में अवनीश जैन, वैभव जैन, अनिल जैन, संयम जैन, नमन जैन, निशांत जैन, मुकेश जैन, दीपक जैन एवं प्रदीप जैन उपस्थित रहे। परमाउंट जैन मंदिर में अध्यक्ष विपिन जैन, महामंत्री संदीप जैन, मंत्री अनिल जैन एवं कोषाध्यक्ष कुलदीप जैन सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने धर्म आराधना की।

अब उत्तम आर्जव धर्म की आराधना

दशलक्षण महापर्व के आगामी दिनों में उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की क्रमशः आराधना की जाएगी। इनके माध्यम से आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संदेश दिया जाएगा।