यशोगाथा श्रवणबेलगोला कीश्रवणबेलगोला वह स्थान है, जहां 1000 वर्षों से भी अधिक समय से भगवान गोम्मटेश्वर बाहुबली की 57 फीट ऊंची दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थित है। यह जैन श्रमण परंपरा एवं संस्कृति का अप्रतिम तीर्थ है, जिसकी यशोगाथा यहां पाए गए शताधिक प्राचीन प्राकृत शिलालेखों में अंकित है। श्रवणबेलगोला के जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चरुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी की प्रेरणा से वहां स्थित 'राष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन और अनुसंधान संस्थान' के द्वारा प्राचीन शिलालेखों, हस्तलिखित पाण्डुलिपियों आदि का संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य चल रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े जाने-माने विशेषज्ञों ने फिल्म के विषय, स्क्रिप्ट, फिल्मांकन, निर्देशन और प्रस्तुति को एक स्वर में सराहा एवं डॉ. अरिहन्त को इस हेतु बधाई दी। यह फिल्म हिन्दी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में भी प्रदर्शित हो चुकी है।
दिया प्रश्नों का समाधानकार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रश्नोत्तरी चर्चा सत्र प्रारंभ हुआ, जिसमें फिल्म के विषय से संबन्धित प्रश्न पूछे गए, जिनका डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक डॉ. अरिहन्त जी ने सारगर्भित समाधान किया । उन्होंने बताया कि प्राकृत भाषा सर्वप्राचीन भाषा है, जो कि अनेक शताब्दियों तक जनभाषा रही है और अनेक भारतीय भाषाओं की जननी है। यह भाषा जिस भी प्रांत में गयी, उस जगह के अनुरूप ढल गई और इसके भी कई प्रकार हो गए। उन्होंने बताया कि कलिंग नरेश सम्राट खारवेल एवं सम्राट अशोक के समय इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त था और यही कारण है कि अशोक के जितने भी शिलालेख हैं, वे प्राकृत भाषा एवं ब्राह्मी लिपि में हैं। साथ ही उन्होंने उड़ीसा स्थित खारवेल के सर्वप्राचीन हाथीगुंफा प्राकृत शिलालेख का प्रमाण देते हुए बताया कि उसमें यह लिखा है कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत चक्रवर्ती के नाम पर इस देश का नाम ‘भारतवर्ष’ पड़ा। इसके साथ ही प्राकृत के विपुल साहित्य पर भी चर्चा की और बताया कि ऐसा कोई भी विषय अछूता नहीं है, जिसका सृजन प्राकृत साहित्य में न हुआ हो। कई लोगों के लिए यह पहला अवसर था कि वे प्राकृत भाषा एवं साहित्य से प्रथम बार परिचित हो सके।
एक परिचयडॉ. अरिहन्त, क.जे. सोमैया इंस्टीट्यूट ऑफ धर्मा स्टडीस, सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वैश्विक स्तर पर प्राकृत भाषा की समृद्ध परंपरा को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से अङ्ग्रेज़ी में प्रकाशित ‘Prakrit Times International Newsletter’ के आप संपादक हैं । आपके इस अभिनव कार्य के लिए नेशनल मीडिया फ़ाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा हाल ही में आपको ‘नेशनल गौरव अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।
शोध की संभावनाएंसमापन सत्र में श्रीहरि कुलकर्णी ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यक्रम की सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ.अरिहन्त के माध्यम से आज हम सभी प्राकृत भाषा एवं साहित्य के माहात्म्य से करीब से परिचित हो पाये हैं, जिसके विपुल साहित्य पर शोध की अपार संभावनाएं हैं। इस कार्यक्रम में फिल्म, साहित्य, लेखन, अभिनय और रंगभूमि के क्षेत्र से जुड़े कई नामी गिरामी हस्तियां उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन कल्याणी कुमारी ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अरुण शेखर, जगदीश निषाद, ज्योति, कल्याणी कुमारी का महत्त्वपूर्ण सहयोग रहा।




