मुरैना। इस वर्ष दीपावली से पूर्व 01 नवंबर को पुष्य नक्षत्र योग बन रहा है । रविपुष्यामृत योग खरीदारी के लिए अत्यंत ही शुभ माना जाता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि 27 नक्षत्रों में पुष्य नक्षत्र को विशेष शुभ और प्रभावशाली माना गया है। दीपावली से पहले पुष्य नक्षत्र का रविवार या गुरुवार के दिन संयोग होने पर क्रमशः रविपुष्यामृत योग और गुरुपुष्यामृत योग बनता है। इस वर्ष 1 नवंबर, रविवार को रविपुष्यामृत योग का विशेष संयोग बन रहा है। डॉ. जैन के अनुसार, 1 नवंबर को प्रातः 5.40 बजे, सूर्याेदय के साथ पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा, जो अगले दिन रात्रि 4रू31 बजे तक रहेगा। इस दौरान खरीदारी और नए कार्यों का शुभारंभ किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों में विशेष महत्व प्राप्त है। जिस प्रकार जंगल के पशुओं में सिंह को प्रमुख माना जाता है, उसी प्रकार पुष्य नक्षत्र को शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने कहा कि इस नक्षत्र में सोना-चांदी, आभूषण, सिक्के, व्यापारिक उपकरण, बहीखाते और लेखा पुस्तकों की खरीदारी के साथ दुकान अथवा प्रतिष्ठान का शुभारंभ करना अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं स्थायित्व और समृद्धि का प्रतीक होती हैं। दीपावली की तैयारियों के लिए भी यह विशेष अवसर रहेगा।
रविपुष्य के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग
ज्योतिषाचार्य डॉ जैन ने बताया कि 1 नवंबर, रविवार को रविपुष्यामृत योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग रहेगा। इसी दिन कालाष्टमी और अहोई अष्टमी भी मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि दोपहर 2.52 बजे से इन पर्वों से संबंधित विशेष संयोग रहेगा। डॉ जैन के अनुसार, इस शुभ अवसर पर बाजारों में देर रात तक खरीदारी की जा सकेगी। दीपावली पूजन सामग्री, कपड़े, सोना-चांदी के सिक्के, इलेक्ट्रॉनिक सामान और व्यापार से संबंधित वस्तुओं की खरीदारी के साथ मकान, दुकान अथवा अन्य संपत्ति के अनुबंध की योजना बनाने वाले लोग भी इस दिन को शुभ मानते हैं। इस प्रकार 1 नवंबर का दिन दीपावली की खरीदारी और नए कार्यों के शुभारंभ के लिए विशेष महत्व रखेगा।




