दीक्षा स्थल पहुंची रानू का कुछ ही क्षणों में वेष बदल गया। रंगीन परिधानों, जेवरात से सजी-धजी रानू ने सफेद वस्त्र धारण कर लिए। ये देख मां अंजू
और पिता पारस जैन भावुक जरूर हुए लेकिन बेटी के त्याग पर गर्व किया व खुशी जताई। गणीवर्य आनंदचन्द्र सागर और मुनि रजतचंद्र विजय ने
26 वर्षीय रानू को दीक्षा दिलाई। सुबह 6 बजे से दलालबाग में दीक्षा कार्यक्रम हुए। बड़ी संख्या में जैन समाजजन इसमें शामिल हुए।
5 हजार किमी विहाररानू दीक्षा से पहले संतों के साथ भी रहीं हैं। संतों से मार्गदर्शन लेकर वैराग्य का रास्ता चुना। उनके साथ 5 हजार किमी विहार कर चुकी हैं। बीकॉम करने के बाद वे सीए बनना चाहती थीं लेकिन मन में दीक्षा लेने की भावना आई। पिता पारस किराना व्यवसायी हैं।




