इंदौर। हाल ही में दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भारतीय ज्ञान परंपरा की 2000 वर्ष प्राचीन अमूल्य निधि ‘तिरुक्कुरल’ (कुरल काव्य) का रूसी अनुवाद भेंट किया। जिसे तमिल गीता के नाम से भी जाना जाता है। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि इस कालजयी ग्रंथ के रचयिता जैनाचार्य कुंदकुंद स्वामी हैं, जिन्हें तमिल परंपरा में संत तिरुवल्लुवर के नाम से जाना जाता है। वहीं उनके अन्य प्रचलित नामों में एलाचार्य, गिद्धपिछाचार्य आदि है। पहली शताब्दी में रचित यह ग्रंथ किसी जाति, धर्म, पंथ की सीमा से परे संपूर्ण मानवता के कल्याण के 1080 सूत्र देता है। मूल जैन परंपरा के अनुसार 108 अध्याय हैं और प्रत्येक अध्याय में 10 सूत्र है। इसमें कुल 1080 सूत्र हैं। यह नीति, समाज और धर्म शास्त्र का अद्भुत संगम है। तमिलनाडु में माताएं बच्चों को लोरी के स्थान पर कुरल की गाथाएं सुनाती हैं। ग्रंथ की सार्वभौमिकता पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था-संत तिरुवल्लुवर ने किसी राज्य, देश, भाषा या धर्म की बात न करके समग्र विश्व के मानव कल्याण के लिए प्रेरणास्पद सूत्र दिए हैं। उनके विशद ज्ञान से मैं अभिभूत हूं।

80 भाषाओं में अनुवाद, 1953 में पहला हिन्दी अनुवाद

मूलतः तमिल में रचित इस ग्रंथ का हिन्दी-संस्कृत अनुवाद 73 वर्ष पूर्व विद्या भूषण पं. गोविंदराय जैन ने किया था। जिसे वीर निर्वाण संवत 2480 (सन 1953) में जैनेंद्र प्रेस, ललितपुर से प्रकाशित किया गया। बाद में श्रमण मुनि श्री अमितसागर जी ने इसका विस्तृत विवेचन प्रकाशित करवाया। आज यह ग्रंथ विश्व की 80 से अधिक भाषाओं में अनुदित हो चुका है। इसके विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशन में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का विशेष आशीर्वाद रहा है। हिन्दू इसे पांचवां वेद मानते हैं तो जैन इसे आगम तुल्य मानते हैं। यह हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी, जैन सभी में समान रूप से आदरणीय है। भारतीय डाक विभाग द्वारा संत तिरुवल्लुवर पर दो महत्वपूर्ण डाक टिकट भी जारी किए गए हैं।

इन समाजजनों ने पीएम मोदी का जताया आभार

इस अवसर पर वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के मार्गदर्शक हुकुमचंद सांवला (पूर्व अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद), अरविंद जैन, राजेश जैन फूलजी बा, राजमल सूर्या, सुरेंद्र मूणत, राजेश मोदी, मुकेश जैन विनायका, सुनील कांठेड़, मुकेश व्होरा, विजय बाफना, महेंद्र सुंदेचा, राजेंद्र सराफ, अनिल लुनिया, अरुण सुंदेचा, सर्वेश मंडलेचा, सौरभ जैन, विमल नाहर, पवन पाटोदी, मनोज गोधा, सुशील दिलीप मोदी, अभय पाटोदी, ललित गोधा, विपिन पाटनी, स्वप्निल जैन, ओम पाटोदी, जिन शासन एकता संघ के राकेश गोहिल, मयंक जैन, राजेश जैन दद्दू एवं भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा के टीके वेद, देवेंद्र सेठी, कैलाश लुहाड़िया, तल्लीन बड़जात्या, राकेश पाटनी, पवन पाटोदी पुरातत्व संयोजक ओम पाटोदी ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।