जिसका जन्म हुआ है, उसका जाना भी निश्चित है। किंतु कुछ पुण्यात्माएं अपने संस्कारों के माध्यम से समाज को ऐसी अमूल्य देन दे जाती हैं, जिन्हें पीढ़ियां स्मरण करती हैं।

पिपलगोन निवासी सोमचंद जी जैन की धर्मपत्नी श्रीमती विमला बाई जैन का 28 सितंबर 2026 को प्रातः 2:30 बजे निधन हो गया। उनका जीवन धर्म, त्याग, तप और संस्कारों की सजीव पाठशाला रहा।

माता विमला बाई ने अपने बच्चों को केवल ममता नहीं दी, बल्कि संस्कारों का अमृत पिलाया। उन्हीं संस्कारों की पावन छाया में पले चक्रेश जैन आज अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के रूप में आत्मकल्याण के साथ असंख्य जनों के जीवन में धर्म और संयम का प्रकाश फैला रहे हैं।

एक त्यागी संत का निर्माण केवल एक दिन में नहीं होता। उसके पीछे मां की ममता, अनुशासन, तप, त्याग और संस्कारों की दीर्घ साधना होती है। श्रीमती विमला बाई जैन का मातृत्व इसी अर्थ में वंदनीय है कि उन्होंने समाज को एक ऐसी विभूति दी, जो जिनवाणी के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रही है।

श्रीमती विमला बाई जैन के पुत्र स्व. पंकज जैन, दीपक जैन (डायरेक्टर, श्रीफल मीडिया समूह), चक्रेश जैन (अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज) एवं भूपेंद्र जैन तथा पुत्रियां बबीता (विनीता ) हैं।

हम सभी पुण्यात्मा माता श्रीमती विमला बाई जैन को विनम्र नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

अंतिम यात्रा : 28 सितंबर 2026, प्रातः 11 बजे, पिपलगोन से निकलेगी।