पीठ। दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। जैन धर्म के दशलक्षणों में उत्तम त्याग धर्म आठवां धर्म है, जो संग्रह और आसक्ति को सीमित कर आत्मकल्याण की दिशा में बढ़ने की प्रेरणा देता है।

अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने बताया कि इस अवसर पर श्रीजी का अभिषेक, पूजन, आरती, प्रतिक्रमण एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने भक्ति के साथ धर्माराधना कर त्याग की भावना को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

दीक्षा संकल्पी जयश्री दीदी का सान्निध्य

कार्यक्रम में दीक्षा का संकल्प लेने वाली जयश्री दीदी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। उनके सान्निध्य ने उपस्थित समाजजनों में त्याग, वैराग्य और धर्मसाधना की प्रेरणा का संचार किया।

पुण्यार्जक परिवार

कार्यक्रम के पुण्यार्जक सुषमा देवी-भंवरलाल डेचिया एवं चंदा देवी-महेंद्र डेचिया रहे।

कार्यक्रम में सहभागिता

रितु-प्रसन्न, पल्लवी-मयंक डेचिया सहित अन्य परिवारजन एवं समाजजन उपस्थित रहे।

प्रेषक : राजकुमार डेचिया