इंदौर। सन्मति समोशरण में गुरुदेव प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा मनुष्य के जीवन में समय सबसे अमूल्य संपदा है। धन, वैभव और खोई हुई वस्तुएँ दोबारा प्राप्त की जा सकती हैं, लेकिन बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना ही सच्ची बुद्धिमानी है। संघस्थ आर्यिका सम्पूर्णमति माताजी से प्राप्त जानकारी के अनुसार धर्मसभा में समय के महत्व को समझाते हुए कहा गया कि “समय-समय का फेर है, समय-समय का ध्यान रखो। समय आता नहीं, चाहे उसे कितना भी पुकारो।” मनुष्य को अपने जीवन में समय की गति को पहचानना चाहिए। बचपन कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता और देखते ही देखते जवानी आती है तथा फिर बुढ़ापे का दौर सामने खड़ा होता है। आज जब मनुष्य शीशे में अपना चेहरा देखता है तो उसे महसूस होता है कि समय के साथ उसका रूप कितना बदल चुका है।
बड़े-बड़े सिकंदर आए और चले गए
समय की इसी सच्चाई को समझाते हुए कहा गया कि यह शरीर मिट्टी का खिलौना है, जिसे एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाना है। इतिहास में बड़े-बड़े सिकंदर आए और चले गए, लेकिन अंततः सभी को इस संसार से खाली हाथ ही विदा होना पड़ा। इसलिए जीवन में धन, पद और भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागने के साथ-साथ आत्मकल्याण और जीवन की सार्थकता पर भी विचार करना चाहिए।
इच्छाओं को पूरा करते-करते कब उम्र छोटी पड़ जाती है
समय निरंतर बहने वाली नदी की धारा के समान है। नदी की धारा को रोकने के लिए मनुष्य बांध बना सकता है, लेकिन समय की गति को रोकने का सामर्थ्य किसी में नहीं है। जो समय बीत गया, वह फिर लौटकर नहीं आता। इसी कारण समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति ही वास्तविक अर्थों में बुद्धिमान कहलाता है। आज का मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे लगातार भाग रहा है। उसे नया फोन चाहिए, नई गाड़ी चाहिए, नया जमाना चाहिए। मन और दिल को खुश रखने के लिए रोज कोई नया बहाना चाहिए। लेकिन इन इच्छाओं को पूरा करते-करते कब उम्र छोटी पड़ जाती है, इसका एहसास भी नहीं होता। अंततः समझ आता है कि सच्ची खुशी का ठिकाना केवल बाहरी वस्तुओं में नहीं है।
आत्मचिंतन, धर्म, साधना, सेवा और अच्छे कर्मों में भी हो
इसलिए आवश्यकता है कि मनुष्य समय रहते जागे और अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को सार्थक बनाए। समय का सदुपयोग धन कमाने, सुख-सुविधाएँ जुटाने तक सीमित न रहे, बल्कि आत्मचिंतन, धर्म, साधना, सेवा और अच्छे कर्मों में भी हो क्योंकि समय को जिसने पहचान लिया, उसने जीवन को पहचान लिया; और जिसने समय को व्यर्थ गंवा दिया, उसने अपने जीवन का एक अनमोल हिस्सा खो दिया।



