आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में जैन धर्म पर आधारित शानदार सत्र में युवा सोच को प्रेरित किया जा रहा है और जैन दर्शन, मूल्यों, आध्यात्मिकता तथा आत्म-विकास के मार्ग की गहरी समझ प्रदान की जा रही है। रविवार को पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य श्रमण मुनि श्री समत्व सागर जी, श्रमण मुनि श्री शील सागर जी’ श्रमण मुनि श्री सुप्रभात सागर जी ससंघ के सानिध्य में युवा एवं युवतियों और पुरुष एवं महिलाओं को वंडरफुल जैनिज़्म 9 में इनवोक योर इनर पावर में क्या आप अपनी छिपी हुई ऊर्जा को जागृत करना चाहते हैं? के बारे में बताया गया। इस अवसर पर मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया गया। ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता से भरपूर यह सत्र इतना प्रभावशाली था कि सभागार युवाओं से खचाखच भरा हुआ था। पूरे उत्साह के साथ युवाओं ने एक स्वर में उद्घोष किया प्राउड टू बी अ जैन। संयुक्त धर्म सभा में मुनि श्री 108 समत्व सागर जी ने विशेष सत्र में कहा कि माता-पिता याद आते हैं, यानी कि सबसे हृदय में कौन रहते हैं? माता-पिता और माता-पिता कहीं भी आंख बंद करो, तुरंत माता-पिता याद आ जाते हैं। यह फ्लैशबैक में जाने की आपकी आदत आज हम कुछ ऐसा ही करते हैं। चलते हैं फ्लैशबैक स्टोरी की ओर और जानने का प्रयास करते हैं कि आखिर इस भारत का हृदय क्या है और भारत के हृदय में कौन बसता है। इसलिए आज का थीम हार्ट ऑफ भारत।
भारत के हृदय में कौन बसता है? आपके हृदय में पता नहीं
भारत के हृदय में कौन बसता है? आपके हृदय में पता नहीं कौन-कौन बसता है, लेकिन भारत के हृदय में कौन है इसको जानने के लिए आज हम यहां पर एकत्रित हैं। और आपसे सबसे पहले यह प्रश्न कर लेता हूं, आप लोग भारत में आए कहां से हैं? मुगल भारत में कहीं से आए, यवनों ने आक्रमण किया। मुगल आए, अंग्रेज आए, अनेक बार वैदिक आर्यों का आगमन हुआ। क्या आप जानते हैं भारत की भूमि को ‘हिंदुस्तान’ कैसे कहा जाता है? कोई जानता है ‘हिंदुस्तान’ क्यों कहलाता है यह भारत? हिंदुस्तान भारत का नाम ही नहीं था। यह था वह प्रांत जहां पर अखंड भारत था और उस अखंड भारत की विदेशी लोग जब इसे देखते थे तो सिंध नदी-सिंध नदी, सिंध नदी-के इस तरफ जो भारतवर्ष था वह पूरा का पूरा सिंध प्रांत के नाम से जाना जाता था। किस नाम से? सिंध प्रांत के नाम से लेकिन सिंध का जब दूसरे लोग आए, आक्रमणकारी आए, और जब अलेक्जेंडर का समय था-लगभग आज से 2300 वर्ष पूर्व, 327 ईसा पूर्व... मतलब आज कौन सा सन चल रहा है? अरे भाई, चिंता नहीं करो! आज आपके में दिल को झकझोरने वाला हूं कि आपके हृदय में अभी तक कोई और बैठा था, आज आप जो देखेंगे कि भारत के हृदय में जो बैठा है, वह आज से तुम्हारे हृदय में बैठ जाएगा।
सबसे प्राचीनतम सभ्यताओं में यदि देखा जाए तो सिंधु घाटी की सभ्यता
इसलिए सबसे पहले जब 327 बीसी (ठमवितम ब्ीतपेज)कृयानी लगभग आज से 2300 वर्ष पूर्व पहले जब अलेक्जेंडर सिंध नदी को पार करके आया था, सिकंदर को जानते हैं? सिकंदर! सिकंदर भी किसी से हारा था ना? सिकंदर भी हारा था और सिकंदर ने अपना किसी को गुरु बनाया था तो वह कोई और नहीं थे, वह दिगंबर जैन मुनि थे। जब सिकंदर भारत आया था तब सिंधु घाटी की सभ्यता के पास में यह कौन सी सभ्यता कहलाती थी? सबसे प्राचीनतम सभ्यताओं में यदि देखा जाए तो सिंधु घाटी की सभ्यता। यह आज जो भारत दिखाई दे रहा है, पाकिस्तान भी जहां उसी का अंग था, और पाकिस्तान में सिंध नदी बहती है और उस सिंध नदी के आसपास का एरिया आज भी सिंधु घाटी की सभ्यता के रूप में हड़प्पा, मोहन जोदड़ो यह जो नगर थे। आखिर इन पर किनका साम्राज्य था? यहां कौन रहता था? इस बात के इतिहासकारों ने बहुत खोजना प्रारंभ किया, लेकिन आज आपको पता लग जाएगा कि यह कौन लोग वहां रह सकते थे और यह सब कैसे चलता आ रहा था।
उच्चारण दोष के कारण हुआ हिंदुस्तान
सिंध घाटी से जैसे ही अलेक्जेंडर आया, वहां के लोग ‘स’ का उच्चारण नहीं कर पाते थे। और जब ‘स’ का उच्चारण नहीं होता था, तो वह ‘सिंध घाटी’ को ‘हिंद’, ‘सिंध’ प्रांत’ को ‘हिंद प्रांत’ हो गया। क्या हो गया? हिंद प्रांत। जब हिंद प्रांत हो गया... कभी आपने सुना है किसी देश के लोगों को कैसे बुलाया जाता है? अगर कोई बिहार का है तो उसे क्या बोलते हैं? क्या बोलेंगे? बिहारी। यदि कोई चीन का है तो क्या बोलेंगे? चीनी। यदि कोई भूटान का है तो? कश्मीर का है तो? और भिंड का है तो?
जवाहरलाल नेहरू ने लिखी, डिस्कवरी ऑफ इंडिया
अरे, अभी कोई भिंड का आता है तो हम लोग उसे भिंडी बोलते हैं, बिल्कुल सही है! क्यों? बिहार से बिहारी, है ना? कश्मीर से कश्मीरी, चीन से चीनी तो हिंद के जितने निवासी थे, उनका नाम था हिंदी। क्या नाम था? जितने लोग हिंद के... यह हिंद कहलाता था, हिंद के निवासी हिंदी हो गए और वह हिंद धीरे-धीरे करके लोगों ने उसे ‘हिंदू’ बना दिया, और इसका नाम ‘हिंदुस्तान’ कह दिया। किंतु, जब ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ जवाहरलाल नेहरू ने लिखी, डिस्कवरी ऑफ इंडिया में जब हम इसके प्रमाण देखते हैं तो वहां मिलता है कि यह प्रांत कभी भी हिंदुस्तान के नाम से प्रचलित ही नहीं था। यह था ‘हिंद’ और यहां पर रहने वाले कोई भी जो लोग रह रहे थे, आते हुए बसते जा रहे थे, वे सब हिंदी कहलाते थे। लेकिन इससे पूर्व में इस पूरे अखंड भारत का नाम यदि कोई था, तो वह श्अखंड भारत भारतवर्षश् था, जो कि चक्रवर्ती भरत सम्राट के नाम से यहां चला आ रहा था। मंच संचालन विजय शास्त्री ने किया
कार्यक्रम में यह समाजजन मौजूद रहे
इसमौके पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन ,रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती ज्वैलर्स), शैलेश जैन, मुकेश जैन,विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, सचिन जैन, आशु जैन (वी.के), विजय जैन शास्त्री, आशु बाबा, अनिकेत जैन, रोहित जैन, नितिन जैन,सतेंद्र जैन, सोनू), देवेंद्र जैन, मुरारी लाल जैन, दीपक जैन, गौरव जैन, मुन्ना लाल जैन, संभव जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज मौजूद रहा।




