वाराणसी/नीमच। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध, लेखन एवं सामाजिक जागरण के क्षेत्र में रामायण आधारित उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों के सम्मान के लिए रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा आयोजित ‘रामायणी सम्मान-2026’ समारोह का भव्य आयोजन वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न प्रांतों से चयनित 28 विभूतियों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
आदित्य जैन को मिला सम्मान
गोस्वामी तुलसीदास जी की पावन जयंती के अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित समारोह में ज्ञानोदय विश्वविद्यालय, नीमच के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक आदित्य जैन को प्रतिष्ठित ‘रामायणी सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया।
प्रख्यात भजन गायक पद्मश्री अनूप जलोटा सहित मंचासीन अतिथियों ने आदित्य जैन को अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न एवं साहित्य भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर श्री जैन की धर्मपत्नी को भी मंच पर आमंत्रित किया गया।
संस्कृति और साहित्य में योगदान
आदित्य जैन को यह सम्मान भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध एवं रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के मूल्यांकन के उपरांत प्रदान किया गया। सम्मान मिलने पर नीमच के साहित्य एवं शिक्षा जगत में हर्ष का माहौल है।
देशभर की विभूतियां हुईं सम्मानित
समारोह की अध्यक्षता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने की। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, नैनीताल-उधमसिंह नगर के सांसद एवं रामायण रिसर्च काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष अजय भट्ट, छत्तीसगढ़ के सांसद चिंतामणि महाराज, श्री आर.के. सिंह (बिहार), डॉ. उदय प्रताप सिंह (काशी), पद्मश्री आचार्य डॉ. हरिहर कृपालु त्रिपाठी, पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय, कनखल हरिद्वार से महर्षि योगी मधुसूदन, साध्वी प्रज्ञा भारती, सीता सखी सोनिया सिन्हा, महासचिव कुमार सुशांत, एडीजी नवीन अरोड़ा, एचडीएफसी के जोनल हेड, प्रो. पांडेय, बालव्यास वैदेहीनंदन पंडित वेदांत, काउंसिल के ट्रस्टी एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता भरत नागर, सीतामढ़ी के जिला संगठन प्रभारी नीरज गोयनका, श्रीरामजानकी मठ जीर्णोद्धार समिति के प्रभारी विजय कुमार सहित अनेक संत, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अनूप जलोटा और अनुराधा पौडवाल भी सम्मानित
समारोह में प्रमुख रूप से पद्मश्री अनूप जलोटा, पद्मश्री अनुराधा पौडवाल सहित मध्यप्रदेश के इंदौर से अभय मानके को भी सम्मानित किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संतों, विद्वानों, शोधार्थियों एवं साहित्यकारों ने रामायण के जीवन मूल्यों और भारतीय संस्कृति में उसके व्यापक प्रभाव पर विचार रखे।
रामायण के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदे
रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी एवं ‘रामायणी सम्मान’ समारोह के संयोजक डॉ. देवदत्त शर्मा (सेवानिवृत्त आईएएस) ने कहा कि यह सम्मान उन मनीषियों के प्रति विनम्र कृतज्ञता है, जिन्होंने रामायण के सार्वभौमिक मूल्यों, शोध, साहित्य एवं लोकजागरण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।
रामायण रिसर्च काउंसिल की प्रभारी साध्वी प्रज्ञा भारती एवं अन्य पदाधिकारियों ने समारोह में देश-विदेश से पहुंचे संतों, विद्वानों और शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह ने रामायण के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और शोध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।




