नौगामा। दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर आदिनाथ मंदिर, 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर एवं सुखोदय तीर्थ नसियाजी में विविध धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आयोजित किए गए।

प्रातःकाल विशेष शांतिधारा एवं अभिषेक के बाद आदिनाथ मंदिर से श्रीजी की प्रतिमा को भक्ति भावपूर्वक पंडाल में लाकर सिंहासन पर विराजमान कराया गया। इसके पश्चात विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ शांतिधारा संपन्न हुई।

पूजन और तत्त्वार्थसूत्र का वाचन

शांतिधारा के बाद गीतकार राजेंद्र जैन, अभिषेक शास्त्री, दृष्टि नानावटी एवं वीना दीदी के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने पूजन किया। पूजन के उपरांत बालिका मंडल ने तत्त्वार्थसूत्र का वाचन प्रस्तुत किया।

48 दीपों से हुई भक्तामर महाआरती

सायंकाल आचार्य भक्ति एवं प्रतिक्रमण के बाद आदिनाथ मंदिर में भक्तिमय वातावरण बना। गीतकार के मधुर स्वर एवं वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच भक्तामर स्तोत्र के 48 दीप प्रज्वलित कर महाआरती की गई।

महाआरती के बाद अभिषेक शास्त्री ने उत्तम त्याग धर्म पर मार्मिक प्रवचन देते हुए कहा कि त्याग से मन निर्मल होता है और आत्मा को सच्ची शांति प्राप्त होती है। उत्तम त्याग व्यक्ति को आसक्ति और संग्रह की भावना से दूर कर आत्मिक शांति की ओर ले जाता है।

उन्होंने संदेश दिया—“उत्तम त्याग के माध्यम से जीवन बने निर्मल, मन बने शांत और आत्मा बने परमात्मा।”

बच्चों की धार्मिक प्रस्तुतियां

प्रवचन के बाद जैन पाठशाला के छोटे-छोटे बालक-बालिकाओं ने सुंदर धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उपस्थित श्रद्धालुओं ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उत्साहवर्धन किया।

पुण्यार्जक परिवार

विशेष शांतिधारा का प्रथम सौभाग्य पंचोली दीपक अमृतलाल को प्राप्त हुआ।

श्रीफल साथी : सुरेश चंद्र गांधी, नौगामा