नौगामा। पर्युषण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म के अवसर पर आदिनाथ मंदिर, 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर एवं सुखोदय तीर्थ नसियाजी में विविध धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजित किए गए।
प्रातःकाल विशेष शांतिधारा एवं अभिषेक के बाद श्रीजी को गाजे-बाजे के साथ पंडाल में सिंहासन पर विराजमान कराया गया। इसके पश्चात विशेष अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। राजेंद्र जैन की मधुर स्वर लहरियों के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ।
दशलक्षण और पंचमेरु पूजन
शास्त्री रमेश गांधी, दृष्टि नानावटी एवं वीना दीदी के सान्निध्य में दशलक्षण पूजन एवं पंचमेरु पूजन विधि-विधान से संपन्न हुआ। आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त करते हुए महाअर्घ्य समर्पित किया गया।
तत्पश्चात बालिका मंडल द्वारा तत्त्वार्थसूत्र का वाचन किया गया। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर धर्मलाभ लिया।
प्रवचन और नाटिका ने बांधा समां
सायंकाल महाआरती एवं प्रतिक्रमण के बाद भैया जी ने उत्तम तप धर्म के महत्व पर मार्मिक और प्रेरणादायी प्रवचन दिए। इसके बाद मनीषा नानावटी के निर्देशन में ‘नेमी और राजुल’ नाटिका का मंचन हुआ।
कलाकारों ने अपनी प्रभावी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरे दिन मंदिर परिसर तप, भक्ति और धार्मिक संस्कारों के वातावरण से सराबोर रहा।
श्रीफल साथी : सुरेश चंद्र गांधी, नौगामा




