नौगामा (बांसवाड़ा)। दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना के अवसर पर रविवार, 20 सितंबर को आदिनाथ मंदिर एवं श्री 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर में विशेष अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद भगवान की प्रतिमा को पंडाल में विराजमान करने का पुण्यार्जन पंचोली जितेंद्र-केसरीमल को प्राप्त हुआ।

गरबा नृत्य के साथ समर्पित किए पूजन के अर्घ्य

गीतकार राजेंद्र जैन, विधानाचार्य रमेश चंद्र गांधी सांगानेर एवं संस्थान से पधारे अभिषेक शास्त्री के सान्निध्य में देव-शास्त्र-गुरु पूजन, सरस्वती पूजन एवं दशलक्षण पूजन भक्तिभाव से किया गया।

श्रद्धालुओं ने गरबा नृत्य करते हुए पूजन के अर्घ्य समर्पित किए। इसके बाद बालिका मंडल ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया।

गाजे-बाजे के साथ निकली आदिनाथ भगवान की शोभायात्रा

दोपहर में गाजे-बाजे के साथ श्री 1008 भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। शोभायात्रा नगर से होते हुए सुखोदय तीर्थ नसियाजी पहुंची।

यहां भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा के समक्ष नानावटी राहुल-लक्ष्मीलाल द्वारा भगवान आदिनाथ की प्रतिमा विराजमान की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अभिषेक एवं शांतिधारा की।

अभिषेक का प्रथम पुण्यार्जन पंचोली केसरीमल-शांतिलाल परिवार तथा द्वितीय बोली का पुण्यार्जन नानावटी राहुल-लक्ष्मीलाल परिवार को प्राप्त हुआ।

पहली बार हुआ सम्मेद शिखर विधान

आयोजकों के अनुसार भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा विराजमान होने के बाद सुखोदय तीर्थ नसियाजी में पहली बार सम्मेद शिखर विधान एवं अभिषेक-शांतिधारा का आयोजन किया गया। सम्मेद शिखर विधान के पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य पंचोरी शांतिलाल को प्राप्त हुआ।

24 टोंक और सात गुफाओं में समर्पित किए अर्घ्य

विधान एवं पूजन के बाद नसियाजी परिसर में स्थित 24 टोंक, सात गुफाओं, मुख्य मंदिर, मानस्तंभ एवं भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा के समक्ष बोली के माध्यम से अर्घ्य समर्पित किए गए।

इस दौरान तीर्थ परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने सम्मेद शिखर से जुड़े तीर्थंकरों का स्मरण करते हुए धर्म आराधना की।

प्रतिक्रमण के बाद हुई महाआरती

सायंकाल प्रतिक्रमण के बाद मंदिर में महाआरती हुई। इसके पश्चात उत्तम सत्य धर्म के महत्व पर प्रवचन में मन, वचन और कर्म में सत्यता बनाए रखने तथा सत्य को जीवन के व्यवहार में उतारने का संदेश दिया गया।

जैन समाज अध्यक्ष विपुल पंचोली ने आयोजन में सहभागी श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।