नौगामा। पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को आदिनाथ मंदिर, भगवान महावीर समवशरण मंदिर एवं सुखोदय तीर्थ नसियाजी में उत्तम आर्जव धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव से आराधना की गई। विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालुओं को मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखते हुए सरल एवं निष्कपट जीवन जीने की प्रेरणा दी गई।
गाजे-बाजे के साथ श्रीजी को लाए पंडाल
प्रातः श्रीजी का अभिषेक एवं विशेष शांतिधारा की गई। इसके बाद श्रद्धालु गाजे-बाजे और जयकारों के साथ श्रीजी को पंडाल में लेकर पहुंचे, जहां सिंहासन पर विराजमान कर अभिषेक किया गया।
अभिषेक का प्रथम सौभाग्य पंचोली राकेश कुमार-रतनलाल परिवार को प्राप्त हुआ।
भक्ति और गरबा नृत्य के बीच हुई पूजा
पंडित रमेश चंद्र गांधी के सान्निध्य में वाद्ययंत्रों की मधुर स्वर लहरियों और भक्तिमय गरबा नृत्य के बीच देव-शास्त्र-गुरु पूजन, सरस्वती पूजन एवं दशलक्षण पूजन किया गया।
पूजन के बाद बालिका मंडल की ओर से तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। दोपहर में जैन भूगोल विषय पर धार्मिक प्रवचन हुए।
‘सरलता से प्राप्त विश्वास जीवनभर साथ रहता है’
उत्तम आर्जव धर्म का महत्व बताते हुए कहा गया कि आर्जव का अर्थ मन, वचन और कर्म में एकरूपता तथा जीवन में सरलता और निष्कपटता रखना है। जिसके मन में कपट नहीं होता, उसके व्यवहार में सहजता और वाणी में सच्चाई दिखाई देती है।
छल-कपट से मिली सफलता क्षणिक हो सकती है, लेकिन सरलता से प्राप्त विश्वास लंबे समय तक साथ रहता है। आर्जव धर्म मन से कपट दूर करने, वाणी को निर्मल बनाने और व्यवहार में सरलता लाने की प्रेरणा देता है।
भक्तामर के 48 दीपों से हुई महाआरती
सायंकाल मंदिर में भक्तामर के 48 दीप प्रज्ज्वलित कर महाआरती की गई। इसके बाद उत्तम आर्जव धर्म पर धार्मिक प्रस्तुति हुई। महिला नानावटी के सान्निध्य में नेमि-राजुल नाटिका का मंचन भी किया गया।
रविवार को होगा सम्मेद शिखर विधान
जैन समाज अध्यक्ष विपुल पंचोली ने बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी सुखोदय तीर्थ क्षेत्र में रविवार को सम्मेद शिखर विधान का आयोजन किया जाएगा।
जैन समाज प्रवक्ता सुरेश चंद्र गांधी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए समाजजनों से आगामी धार्मिक आयोजनों में सहभागिता का आह्वान किया।




