इंदौर के परिवहन नगर जैन मंदिर में सिद्ध चक्र विधान के छठवें दिन मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज ने कहा कि शब्दों में जीवन बदलने की शक्ति होती है। श्रेष्ठ शब्दों और जैन संस्कृति को अपनाकर शुभ कर्मों को मजबूत करें। — रिपोर्ट: रेखा जैन
“शब्द बदलो… किस्मत बदलते देर नहीं लगती।”
इंदौर। परिवहन नगर जैन मंदिर में सिद्ध चक्र विधान जारी है और छठवें दिन की धर्मसभा में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज ने बेहद सरल, लेकिन असरदार संदेश दिया।उन्होंने कहा— “हम जैसे शब्द बोलते हैं, वैसा ही मन बन जाता है। इसलिए जैन और भारतीय संस्कृति के पवित्र शब्द रोज़मर्रा में अपनाएं। इससे शुभ कर्म बढ़ते हैं और जीवन सही दिशा पकड़ता है।”
अच्छे शब्दों का असरमुनिश्री ने बताया कि गलत या कठोर शब्दों से मन में अशांति फैलती है और अशुभ कर्मों का बंध होता है, जो आगे चलकर जीवन को गलत दिशा में ले जा सकता है।
जबकि संस्कृति से जुड़े पवित्र शब्द मन को शांत, संयमित और सकारात्मक बनाते हैं।
विधान में विशेष घटनाएंविधान की शुरुआत शांतिधारा से हुई, जिसका लाभ दीपाली जैन को मिला।
मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सनत जैन, निधि शैलेश जैन और राजेश पंचोलिया को प्राप्त हुआ।
512 अर्घ्यों की महाअर्चनाविधान में सौधर्म इंद्र कमलेश-टीना जैन सहित सभी इंद्रों ने 512 अर्घ्य चढ़ाकर भगवान के प्रति समर्पण भाव व्यक्त किया। यह दृश्य बेहद भव्य और भावुक करने वाला रहा।
आगंतुकों का स्वागततीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय कार्यकर्ता जैनेश झांझरी, पवन पाटोदी और प्रमोद पापड़ीवाल भी विधान में पधारे।
समाज अध्यक्ष नवनीत जैन, श्रेष्ठी जैन, दीपक जैन और समाजबंधुओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया।“शब्दों को साध लो… जीवन अपने आप सध जाएगा।”





