जैन समाज में उत्साह : मुनि दीक्षा एवं चातुर्मास कलश स्थापना समारोह 25 को

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गुरु की पहचान वेश से नहीं, संयम और आत्मकल्याण की दिशा से होती है : गुरु-मूढ़ता से बचकर सद्गुरु के उपदेश जीवन में उतारें — आचार्य उदारसागर महाराज
मुरैना में आचार्य उदारसागर और मुनि उपशांतसागर महाराज ने गुरु-मूढ़ता से बचने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सद्गुरु की पहचान ज्ञान, संयम, त्याग और वीतरागता की साधना से होती है। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की रिपोर्ट।
मुरैना • मनोज जैन नायक • 30-09-2026, 03:18 pm
एक विचारशील परोपकारी ही साहित्य सृजन कर सकता है: पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी ने विचारों को व्यक्तित्व के लिए सर्वोपरि बताया
पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने दिल्ली में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि विचार और शब्द- साहित्य व्यक्ति के विचारों की अभिव्यक्ति भाषा से होती है। आंतरिक-भावों को शब्द वर्णों (भाषा) से ही व्यक्त किया जा सकता है। विचारों का प्रकटीकरण ही साहित्य के रूप में साकार होता है। एक विचारशील, परोपकारी ही साहित्य का सृजन कर सकता है। दिल्ली से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर...
दिल्ली • अभिषेक अशोक पाटील • 30-09-2026, 03:17 pm



