माँ—एक शब्द, लेकिन उसमें समाया है संपूर्ण सृष्टि का प्रेम, त्याग और करुणा। माँ न केवल जीवन देती है, बल्कि हमें जीना भी सिखाती है। उसके आँचल में सुकून है, उसकी ममता में ईश्वर का स्पर्श है। चाहे वह यशोदा हो, जीजाबाई हो, या आज की आधुनिक माँ—हर युग की माँ ने अपने बच्चों को संस्कार, संबल और स्वाभिमान दिया है। मदर्स डे पर हम उन सभी माताओं को नमन करते हैं, जिन्होंने हमें बनाया, संवारा और हर कठिन घड़ी में मार्गदर्शन किया। आइए आज उनके त्याग, प्रेम और समर्पण को शब्दों से नहीं, भावनाओं से सराहें। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन का विशेष आलेख...

"जब खुदा को हर जगह नहीं रहना था, तो उसने माँ बना दी।" यह उक्ति जितनी सरल लगती है, उतनी ही गहरी और व्यापक है। माँ — यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण भाव है, एक अनुभव है, एक जीवंत चेतना है जो सृष्टि का आधार बनती है। मातृत्व के इस अद्वितीय रूप को समर्पित मदर्स डे, महज़ एक दिन नहीं, बल्कि माँ के प्रति हमारे कृतज्ञता के भाव को प्रकट करने का एक अवसर है।

 

लेकिन क्या माँ को याद करने के लिए सिर्फ एक दिन काफी है? क्या उसका समर्पण, त्याग और तप केवल कुछ शब्दों में समेटा जा सकता है? शायद नहीं, फिर भी हम प्रयास करते हैं — माँ की ममता को शब्दों का स्वरूप देने का। इस लेख में हम इतिहास की उन महान माँओं की चर्चा करेंगे जिन्होंने न केवल अपने पुत्र को जन्म दिया, बल्कि उनके जीवन की दिशा और दर्शन भी तय किए। साथ ही, हम आधुनिक माँओं की बदलती भूमिका और संघर्षों पर भी विचार करेंगे।

इतिहास की महान माताएँ: जिन्होंने इतिहास रचा

1. माँ जीजाबाई (राजमाता जीजाबाई): छत्रपति शिवाजी की प्रेरणा

छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, कुशल रणनीति और राष्ट्रभक्ति को कौन नहीं जानता। लेकिन उनकी इस असाधारण शक्ति का बीज उनकी माँ राजमाता जीजाबाई ने ही बोया था। जीजाबाई ने न केवल शिवाजी को संस्कार दिए, बल्कि युद्ध नीति, राजनीति और धर्म का पाठ भी पढ़ाया। उन्होंने अपने पुत्र को हिंदवी स्वराज की भावना से सींचा और हर कठिन समय में उसकी ढाल बनकर खड़ी रहीं।

 

2. पुत्र मोह की प्रतीक — गंधारी

महाभारत की गंधारी एक ऐसी माँ थीं, जिन्होंने अपने सौ पुत्रों को हर हाल में प्रेम किया, भले ही वे अधर्म के पथ पर चले। उन्होंने अपने जीवन को अंधकारमय बनाकर पतिव्रता धर्म निभाया। गंधारी हमें बताती हैं कि माँ केवल मार्गदर्शक नहीं, एक कठोर नियति को भी आत्मसात करने वाली शक्ति है।

 

3. यशोदा: ममता की पराकाष्ठा

यशोदा माँ, जिन्हें भगवान कृष्ण ने अपनी बाललीलाओं से अलौकिक बना दिया, वो बताती हैं कि माँ होने के लिए जन्म देना आवश्यक नहीं होता। यशोदा की ममता, उनका वात्सल्य आज भी हर रिश्ते को परिभाषित करता है।

 

4. माँ मदालसा: आत्मज्ञान की मूर्तिमान प्रेरणा

पुराणों में वर्णित मदालसा एक ऐसी माँ थीं, जिन्होंने अपने बच्चों को लोरी के रूप में आत्मज्ञान दिया — "तू चैतन्य स्वरूप है, तू अमर आत्मा है।" उन्होंने बच्चों को संसार के मोह से ऊपर उठने की प्रेरणा दी। आज भी वह हर उस माँ की प्रतीक हैं जो अपने बच्चों को सिर्फ सांसारिक नहीं, आत्मिक रूप से भी शक्तिशाली बनाना चाहती है।

 

समय बदला, भूमिका बदली — पर माँ की छवि अमर रही

जैसे-जैसे समय बदला, समाज की संरचना बदली, लेकिन माँ की भूमिका और महत्त्व कम नहीं हुआ। हाँ, अब माँ ऑफिस जाती है, जिम्मेदारियाँ साझा करती है, तकनीक सीखती है, घर और करियर के बीच संतुलन बनाती है, लेकिन फिर भी हर सुबह बच्चों का टिफिन बनाना, होमवर्क देखना और रात को चिंता करना — ये सब उसके मूल में अब भी हैं।

आधुनिक माँ: मल्टीटास्किंग की प्रतिमूर्ति

आज की माँ सीईओ भी है और केयरटेकर भी। वह वर्क फ्रॉम होम करती है और बच्चों के स्कूल में पीटीएम भी अटेंड करती है। वह सामाजिक परिवर्तन की वाहक बन रही है। लेकिन आज की माँ का संघर्ष कुछ और भी है — गिल्ट। ऑफिस में समय देने पर बच्चों की चिंता और घर में रहने पर आत्मनिर्भरता की तलाश — इन दोनों के बीच माँ आज भी त्याग कर रही है, मगर मुस्कराहट के साथ।

सिंगल मदर्स और संघर्ष

आज की दुनिया में लाखों महिलाएं अकेले माँ की भूमिका निभा रही हैं। वे माँ भी हैं, पिता भी। उनका संघर्ष दोहरा है, लेकिन संकल्प अडिग। ऐसी माँएं समाज के लिए मिसाल बनती हैं।

कोरोना काल और माँ

कोविड-19 महामारी ने माँ की भूमिका को और व्यापक कर दिया। जब बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे, तब माँ टीचर बनी। जब कोई हॉस्पिटल में था, माँ नर्स बनी। जब कमाई बंद हो गई, तब माँ ने रसोई में जुगाड़ से चमत्कार किया। महामारी ने माँ की संकट प्रबंधन की क्षमता को दुनिया के सामने उजागर कर दिया।

क्या मदर्स डे मनाना काफी है

हम माँ को एक दिन फूल, कार्ड और सोशल मीडिया पोस्ट से याद करते हैं। लेकिन असल मदर्स डे तो हर वह दिन है, जब हम उनके त्याग को पहचानें। जब हम उनके लिए समय निकालें, जब हम उनकी भावनाओं को समझें।

माँ को समय दो, आदर दो, और उनका सपना पूरा करो — यही सच्चा मदर्स डे है।

समाप्ति नहीं, शुरुआत...

माँ का कोई पर्याय नहीं। वह न तो बदली जा सकती है, न दोहराई जा सकती है। वह एक जीवित देवता है — जो बिना पूजा के पूज्य है। वह एक भावना है — जो शब्दों से परे है।

आज जब हम मदर्स डे मना रहे हैं, तो आइए एक वचन लें — कि हम माँ को केवल श्रद्धांजलि नहीं देंगे, बल्कि उनके जीवन को सम्मान और प्रेम से भर देंगे।

क्योंकि माँ सिर्फ जननी नहीं, जीवन की पहली पाठशाला है — और शायद आखिरी भी।