मुरैना। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के जीवन, साधना, त्याग और संस्कारों को समर्पित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी एवं सकल दिगंबर जैन समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान हुए, जबकि रात्रि में विद्यासागर जैन पाठशाला के बच्चों एवं दीदियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं।

संतों ने बताया आचार्यश्री का प्रेरक जीवन

मुनि श्री 108 उपशांतसागर जी महाराज ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के बाल्यकाल, साधना और समाज के प्रति योगदान से जुड़े प्रेरक संस्मरण सुनाए। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री का बाल्यकालीन नाम विद्याधर था और बचपन से ही उनमें धर्म, अध्ययन तथा आध्यात्मिक चिंतन के संस्कार दिखाई देते थे।

आचार्य श्री 108 उदारसागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन त्याग, तप, संयम, स्वाध्याय और आत्मकल्याण की प्रेरणा देने वाला रहा। उनके विचारों और जीवनचर्या ने समाज तथा नई पीढ़ी को धर्म, शिक्षा और भारतीय संस्कृति से जोड़ने की दिशा दी।

36 महामंडलियों का हुआ विधान

कार्यक्रम के अंतर्गत आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान आयोजित हुआ। श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला के बच्चों, दीदियों एवं समाजजनों ने इसमें उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

विधान में 36 महामंडलियों का विधान 36 समाजबंधुओं द्वारा श्रद्धा और भक्तिभाव से किया गया। विधानाचार्य संजय शास्त्री एवं विद्वान नवनीत जैन शास्त्री ने विधि-विधान से धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराईं तथा श्रद्धालुओं को विधान के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया।

बच्चों और दीदियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

रात्रि में पाठशाला के बच्चों ने जैन धर्म, भारतीय संस्कृति और आचार्यश्री के जीवन-मूल्यों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। दीदियों की प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम को विशेष आकर्षण दिया।

उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों से बच्चों का उत्साहवर्धन किया। पाठशाला के बच्चों को प्रतिभा एवं सहभागिता के लिए पुरस्कार भी वितरित किए गए।

धर्म, शिक्षा और संस्कारों का समन्वय

आयोजन में धर्म, शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। समाजजनों ने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के आदर्शों का स्मरण करने के साथ उन्हें नई पीढ़ी के जीवन में संस्कारों के रूप में स्थापित करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

श्रीफल साथी : मनोज जैन नायक, मुरैना