मुरैना। लोहिया बाजार स्थित श्री चंद्रप्रभु पल्लीवाल दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के दौरान धर्म और भक्ति का उल्लास छाया हुआ है। महिला-पुरुष, बुजुर्ग, युवा एवं बच्चे पारंपरिक पूजन परिधानों में जिनालय पहुंचकर संगीतमय वातावरण में जिनेंद्र प्रभु की आराधना कर रहे हैं।

प्रतिदिन प्रातः भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य पूजन विधि-विधान से किया जा रहा है। पदमचंद जैन पूजन के अर्घ्य बोलते हुए ‘स्वाहा’ का उच्चारण करा रहे हैं। दशलक्षण के प्रत्येक धर्म की विशेष पूजा के साथ श्रद्धालु आत्मकल्याण की भावना से धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर रहे हैं।

भजनों की स्वर लहरियों पर झूमे बुजुर्ग

संगीतमय पूजन और भजनों की मधुर स्वर लहरियों से जिनालय का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। समाज के वरिष्ठजन नेमीचंद जैन, दर्शनलाल जैन, दिनेशचंद जैन, राधेलाल जैन, कन्हैयालाल जैन, महेशचंद्र जैन, विमलचंद जैन, यतींद्र जैन, आशीष जैन एवं प्रदीप जैन सहित श्रद्धालु भक्तिभाव से नृत्य करते हुए जिनेंद्र आराधना में लीन नजर आए।

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शेखर जैन एवं मंत्री अमर जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं।

उत्तम सत्य धर्म की हुई विशेष आराधना

पर्युषण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म की आराधना के अवसर पर जिनालय में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं आरती हुई। श्रद्धालुओं ने सत्य धर्म को अपने जीवन और व्यवहार में अपनाने का संकल्प लिया।

प्रथम अभिषेक का पुण्यार्जन रोशनलाल एवं अनूप कुमार जैन ने किया। चार कलशों से अभिषेक का पुण्यार्जन राधेलाल जैन वर्कशॉप वाले, हरिश्चंद्र जैन सर्राफ, विनोद कुमार-गौरव कुमार जैन तथा अशोक कुमार-अमित कुमार जैन लोहिया बाजार वालों ने किया।

शांतिधारा और सत्य धर्म का अर्घ्य किया समर्पित

प्रथम शांतिधारा का पुण्यार्जन दिनेशचंद, पदमचंद, ईशान एवं अधीश जैन को प्राप्त हुआ, जबकि द्वितीय शांतिधारा प्रदीप कुमार-नेहल कुमार जैन ने की।

उत्तम सत्य धर्म का विशेष अर्घ्य हितेंद्र कुमार एवं लाभांश जैन, अलीगढ़ वालों ने समर्पित किया। धार्मिक कार्यक्रम के समापन पर राधेलाल जैन ने भगवान की आरती की।

दशलक्षण के प्रत्येक धर्म की हो रही विशेष पूजा

मंदिर कमेटी के अनुसार दशलक्षण महापर्व में प्रत्येक दिन संबंधित धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। अभिषेक, शांतिधारा, संगीतमय पूजन और आरती के माध्यम से समाजजन संयम, आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण की भावना के साथ पर्व की आराधना कर रहे हैं।