
विधान के समापन पर श्रीजी को पालकी में सवार कर भव्य आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में इंद्र-इंद्राणी चंवर डुलाते हए चल रहे थे। श्रीजी की शोभायात्रा में युवा भक्त नृत्य एवं जैन सिद्धान्तों पर आधारित भजनों का मंगलगान कर रहे थे। क्ष्रेत्र परकोटा में भ्रमण पश्चात श्रीजी की शोभायात्रा विधान स्थल पर पहुंची। यहां इन्द्रों द्वारा श्री 1008 जिनेन्द्र प्रभु का कलशाभिषेक किया गया। कार्यक्रम के समापन पर पधारे हुए विशेष अतिथियों का सम्मान किया गया। इसके बाद उपस्थित सभी सधर्मी बन्धुओं ने सामूहिक भोज का आनन्द लिया।





