इंदौर। प्राकृताचार्य 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज के सानिध्य में कुंदकुंद ज्ञानपीठ एवं देवी अहिल्या विश्व विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय कुलगुरु सम्मेलन के द्वितीय और तृतीय सत्र में देश भर के विश्वविद्यालय से आए कुलगुरु विद्वानों ने भारतीय प्राकृत ज्ञान पर विशद् विवेचन हुआ। द्वितीय सत्र में नव नालंदा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो.सिद्धार्थ सिंह, इंदौर से डॉ.संगीता मेहता, टीएमयू से आई रेणुका जैन, कविता कासलीवाल सहित अन्य अतिथियों ने प्राकृत भाषा, सिरी भूवलय सहित अन्य विषयों की मीमांसा की। इसके बाद ओपन सत्र में सभी कुल गुरुओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अपनी यूनिवर्सिटी में भी प्राकृत भाषा और जैन दर्शन को पाठयक्रम में शामिल करने की सहमति जताई। राष्ट्रीय कुलगुरु सम्मेलन के तीसरे और अंतिम सत्र में नालन्दा के सिद्धार्थ सिंह, चित्रकूट के आलोक चौबे, श्रवणवेल गोला से आए डॉ.राजेश शास्त्री, राजेश दीक्षित,डॉ. कविता कासलीवाल, डॉ. यतीश जैन, डॉ. रमेश शास्त्री, डॉ. विक्रम परमार, डॉ. अमित हसीजा, प्रो. राहुल सिंघई, प्रज्वल खरे, डॉ.सरिता जैन दोषी आदि ने अपने विचार व्यक्त कर भारतीय ज्ञान परंपरा के उन्नयन के लिए किए गए इस कार्य के लिए कुंदकुंद ज्ञान पीठ और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्टडी फॉर सेंटर के कार्य की सराहना की।
आचार्य श्री ने सम्मेलन की सराहना की
आचार्य श्री सुनीलसागर जी इस समापन सत्र में कहा कि ने अपने मंगल आशीर्वाद में कहा कि कुंदकुंद ज्ञान पीठ ने यह कुलगुरु सम्मेलन आयोजित कर एक छोटा भारत यहां उपस्थित कर दिया है। यहां देशभर के विद्वानों को सुनने का अवसर यहां मिला। भारतीय ज्ञान परंपरा को इन्होंने अपने यहां शुरू करने और कुंदकुंद ज्ञानपीठ के साथ मिलकर कार्य करने का जो संकल्प लिया है। वह सराहनीय है। उन्होंने इस आयोजन के लिए अध्यक्ष अमित कासलीवाल और कुंदकुंद ज्ञानपीठ की टीम को आशीर्वाद प्रदान किया। राष्ट्रीय कुलगुरु सम्मेलन में देशभर के 25 कुलगुरुओं का मार्गदर्शन मिला। प्रो. नलिन के शास्त्री ने संचालन किया। इस अवसर पर मंगलाचरण श्रुति जैन ने किया अमित कासलीवाल, मयंक जैन काला, संजय पापड़ीवाल, राकेश विनायका, ऋषभ जैन, डॉ. अरविंद जैन सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
दोनों सत्र में इनकी मौजूदगी रही
सम्मेलन में नव नालंदा महा विहार-संस्कृति मंत्रालय के सम विश्व विद्यालय के कुलगुरु प्रो. सिद्धार्थ सिंह, रानी दुर्गावती विवि जबलपुर के प्रो. राजेश वर्मा, सतना से बीए चोपडे़, खंडवा से डॉ. अरुण रमेश जोशी, उज्जैन से प्रो. शिवशंकर मिश्र, चित्रकूट से प्रो. आलोक चौबे, पीआईएमआर इंदौर के प्रो. एसएस भाकर, खरगोन से मोहनलाल कोरी, राजगीर से प्रो. सचिन चतुर्वेदी, सेज यूनिवर्सिटी इंदौर से प्रो. डीके पटनायक, प्रो. पृथ्वी यादव, इंदौर की रेनेसा यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति सीए स्वप्निल कोठारी, खरगोन से डॉ. प्रमोद शर्मा, टीएमयू मुरादाबाद से डॉ. राजेश दीक्षित, डॉ. विमलकुमार, प्रो. वीके जैन के अलावा प्रो. नीतेश पुरोहित, डॉ. निलाभ तिवारी, डॉ. गोविंद गंधेय, प्रो. नलिन के शास्त्री, डॉ. कविता कासलीवाल, डॉ. यतीश जैन, डॉ. रमेश शास्त्री, डॉ. विक्रम परमार, डॉ. अमित हसीजा, प्रो. राहुल सिंघई, प्रज्वल खरे उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवी अहिल्या विश्व विद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने की। अंतिम सत्र का संचालन प्रो. नलिन के शास्त्री और आभार डॉ अरविंद कुमार जैन ने किया।




