अहमदाबाद। माता-पिता के महत्व पर मुनिश्री ने दिया संदेश अहमदाबाद में परम पूज्य प्रसन्न मनः मुनि श्री 108 प्रणुत सागर जी महाराज ने धर्मसभा में माता-पिता के महत्व पर प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता केवल हमारे जन्मदाता नहीं होते, बल्कि वे हमारे पहले गुरु, पहला संसार और जीवन की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।
मां का प्रेम और पिता का त्याग
मुनिश्री ने कहा कि मां वह होती है, जो हमारी खुशी में अपनी खुशी खोजती है, जबकि पिता हमारी जरूरतों के लिए अपनी इच्छाओं को चुपचाप पीछे कर देते हैं। हमारी एक मुस्कान के लिए माता-पिता ने न जाने कितनी चिंताएं छिपाईं और हमारे एक कदम आगे बढ़ने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया।
उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में केवल चरण नहीं होते, बल्कि उनमें त्याग, तपस्या, प्रेम, संस्कार और आशीर्वाद का संसार समाया होता है।
23 अगस्त को माता-पिता पद पूज
इसी भाव को जीवन में उतारने के उद्देश्य से परम पूज्य प्रसन्न मनः मुनि श्री 108 प्रणुत सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में माता-पिता पद पूजा का आयोजन किया जाएगा।
यह आयोजन 23 अगस्त 2026, रविवार को दोपहर 1 बजे होगा। इसमें 55 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता के चरणों की पूजा करने का अवसर मिलेगा।
जिन हाथों ने थामा, उन्हीं को सम्मान
आयोजकों ने समाजजनों से सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि जिन हाथों ने जीवन में हमें थामा, आज उन्हीं हाथों को सम्मान देने का अवसर है। जिन चरणों ने हमारे लिए जीवनभर यात्रा की, आज उन्हीं चरणों को श्रद्धा से नमन किया जाए।
माता-पिता का सम्मान ही संस्कार है और उनका आशीर्वाद ही जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
कार्यक्रम स्थल और भोजन व्यवस्था
माता-पिता पद पूजा का आयोजन कच्छ कड़वा पाटीदार समाज वाड़ी, श्वेतांबर जैन मंदिर के पास, अंबिका नगर, अहमदाबाद में होगा। कार्यक्रम के उपरांत समाज के सभी लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी रहेगी।
मुख्य पुण्यार्जक एवं आयोजक
कार्यक्रम के मुख्य पुण्यार्जक परिवार में श्री पुष्पदंतभाई बाबुलाल शाह, श्रीमती छायाबेन पुष्पदंतभाई शाह, कु. धीया, श्री मयंक पुष्पदंतभाई शाह, श्रीमती वैदेही मयंक शाह एवं चि. समर्थ शामिल हैं।
आयोजन प्रसन्न मनः चातुर्मास कमेटी, अहमदाबाद द्वारा किया जा रहा है। समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर माता-पिता के चरणों में श्रद्धा, सम्मान एवं कृतज्ञता अर्पित करने का आह्वान किया गया है।



