सांप दूध पीकर जहर उगलता है और गाय घास खाकर पंचामृत देती है। मन के थक जाने, शरीर को लाचार करने और कुछ भी करने को बार-बार टालते रहने की प्रवृत्ति को आलस्य कहते हैं। ध्यान रखना, आलस्य एक समय तक तो अच्छा लगता है, लेकिन बाद में जब समय का मूल्य समझ में आता है तो पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता। इसलिए अपने किसी भी कार्य को छोटा-बड़ा मत समझो, सिर्फ जुनून और जोश से करते रहो। सफलता और विफलता की चिंता छोड़ो, बस जोश और जुनून को मरने नहीं दो। अनावश्यक नकारात्मक सोच और विचारों को कचरे के डिब्बे में डालकर कार्य में संलग्न हो जाओ।
जुनून और जोश को बरकरार रखने के लिए रोज 30 मिनट योगाभ्यास, ध्यान, व्यायाम करो और 15 मिनट ताजी धूप में शरीर को सेको। फिर देखो सफलता कैसे नहीं मिलती और आलस्य कैसे नहीं भागता। यह जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा और विवेक गंगवाल ने दी।




