जयपुर। जनकपुरी-ज्योति नगर जैन मंदिर में तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर आचार्य श्री आदित्य सागर जी ससंघ के पावन सान्निध्य में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं निर्वाण लाडू समर्पण सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आयोजित किए गए। वर्षा योग के मुख्य संयोजक पदम जैन बिलाला ने बताया की प्रातः नित्य अभिषेक के पश्चात विश्वशांति की भावना से बीजाक्षर युक्त शांतिधारा मंदिर जी में दक्षिण वेदी में विराजित तीर्थंकर पार्श्व नाथ की पाषाण प्रतिमा पर की गई, जिसका सौभाग्य प्रकाशचंद गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ। विद्वान शिखरचंद किरण जैन ने साज-बाज के साथ भगवान पार्श्वनाथ की पूजन कराई
श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक निर्वाण कांड का वाचन करते हुए निर्वाण लाडू समर्पित किए। मुख्य निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य पांडीचेरी के श्री बाबूलाल कासलीवाल परिवार, कालू वालों को प्राप्त हुआ। प्रचार-प्रसार संयोजक राकेश जैन दूरदर्शन के अनुसार धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री आदित्य सागर जी ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का जीवन केवल पूजा-अर्चना का विषय नहीं, बल्कि क्षमा, अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाने वाला आदर्श है। मोक्ष महोत्सव तभी सार्थक है, जब हम उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प ले सकें ।
आचार्य श्री ने आगे कहा कि “मैं मंदिर आया हूं तो अपने हृदय की कलुषता दूर करने और परस्पर वैर मिटाने आया हूं-यह भाव ही मोक्ष सप्तमी की सच्ची सार्थकता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाणोत्सव की अनुमोदना की।



