इस अवसर पर परिषद के अध्यक्ष सुनील शास्त्री टीकमगढ़ ने परिषद के परिचय और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। ब्र. जय कुमार निशांत ने निर्देशकीय वक्तव्य दिया। कार्यक्रम का संचालन परिषद के महामंत्री प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर व पुरस्कार संयोजक डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर ने संयुक्त रूप से किया। आभार परिषद के उपाध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार राजेश रागी बकस्वाहा ने व्यक्त किया।
आयोजन में संघस्थ मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने संगोष्ठी में प्रस्तुत सभी आलेखों पर समीक्षात्मक प्रवचन देकर मार्गदर्शन दिया तथा आयोजन के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजन में प्रभावना जनकल्याण परिषद के फोल्डर एवं अहिंसा करुणा के महावीर जी विशेषांक का विमोचन अतिथियों, विद्वानों द्वारा किया गया।
तीर्थंकर के कुल की रक्षा करना परम कर्तव्य इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दोनों सत्रों में मंगल आशीष वचन प्राप्त हुए। आचार्यश्री ने अपने मंगल उदबोधन में कहा कि लोग आचार्य प्रणीत ग्रंथों के अध्ययन को भूल रहे हैं, जिससे अनेक विसंगतियां समाज में देखने में आ रही हैं। शास्त्रों की बातों को कहने वालों को शास्त्रों की बात करना चाहिए, समाज को भ्रमित नहीं करना चाहिए। जिनवाणी से किसी भी अनुयोग को बाहर करने की बात मन में नहीं आनी चाहिए। जिनवाणी हमारी माता है, अपनी विद्वत्ता का परिचय इसी में है कि जिनवाणी को जनवाणी न बनने दें। जिनवाणी के चारों अनुयोगों को ह्रदय में कंठाहार बनाएं।प्रथमानुयोग के ग्रंथ केवल कथा-कहानी नहीं, जीवन का सार है। उनसे जीवन को सदाचरण से जोड़ने की शिक्षा मिलती है। आज बच्चों के माता-पिता, बच्चों में संस्कार डालने के प्रति प्रयत्नशील नहीं हैं। माताओं ने अपना दूध बच्चों को पिलाना बंद कर दिया है, बाजार का दूध पिलाने लगी हैं इसलिए बच्चे भी उनकी नहीं मानते। हमारे समाज की वेषभूषा बिगड़ रही है, खानपान और खानदान में विकृतियां आ रही हैं, जिससे समाज का गौरव समाप्त हो रहा है। प्रभावना जनकल्याण परिषद को आशीर्वाद प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि अब यह परिषद प्रौढ़ता को प्राप्त हो गयी है। इसी प्रकार प्रभावना के कार्यों में निरंतर संलग्न रहें। पुरस्कार देने से पुरस्कृत होने वाले को कार्य करने में नई ऊर्जा मिलती है। विद्वानों ने आगम सम्मत आलेख प्रस्तुत किए हैं।प्रबंधकारिणी समिति द्वारा सम्मान कार्यक्रम में समागत विद्वानों, अतिथियों का श्री दिगम्बर जैन महावीर जी प्रबंधकारिणी समिति, चातुर्मास समिति, महामस्तकाभिषेक समिति के राजकुमार सेठी, राकेश सेठी, कैलाश पाटनी , अभिषेक छाबड़ा, ताराचन्द्र भोसा, राजकुमार सेठी ने सम्मान किया। आयोजन में परिषद के गौरव संरक्षक डॉ. मणीन्द्र जैन दिल्ली ने भगवान महावीर स्वामी के 2550वें निर्वाण महोत्सव पर प्रवर्तित होने वाले रथ के बारे में जानकारी दी तथा इस महोत्सव को मनाने के लिए जुट जाने का आह्वान किया। इस मौके पर ब्र. जय निशांत जी भैया टीकमगढ़, प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जी धरियावद, अनुपचन्द्र जी एडवोकेट फिरोजाबाद संपादक जैन संदेश, पं. सुनील शास्त्री टीकमगढ़, पं. प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर, डॉ. महेंद्र जैन, राजेश रागी बकस्वाहा, राजेन्द्र महावीर सनावद, मनीष विद्यार्थी शाहगढ़, डॉ. सुनील संचय ललितपुर, अनिल शास्त्री सागर, चेतन शास्त्री बंडा, गजेंद्र शास्त्री, शुभम शास्त्री बड़ामलहरा, प्रदीप जैन शिक्षक, जिनेन्द्र शास्त्री बड़ामलहरा, जयकुमार जैन बड़ागांव, अंकित शास्त्री सोजना, डॉ.प्रफुल्ल जैन मथुरा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर डॉ. पदम राज पाटिल बेलगांव कर्नाटक ने परिषद के तत्वावधान में प्रतिवर्ष एक पुरस्कार देने की घोषणा की, साथ ही जिनकी पुरस्कार देने की घोषणा अवधि समाप्त हो रही थी उन्होंने आगे बढ़ाने की घोषणा की।



