इंदौर। जैन धर्म के ग्यारहवें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ जी का मोक्ष कल्याणक इस वर्ष 28 अगस्त, गुरुवार को श्रावण पूर्णिमा के पावन दिन मनाया जाएगा। इस अवसर पर इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों और चैत्यालयों में विशेष पूजन, अभिषेक और आराधना का आयोजन होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रेयांसनाथ जी का जन्म इक्ष्वाकु वंश में सिंहपुरी नगरी में राजा विष्णु और रानी विष्णुदेवी के घर हुआ था। उनका चिह्न गैंडा है और यक्ष-यक्षी क्रमशः यक्षेंद्र और मानवी देवी हैं। भगवान ने दीक्षा लेकर कठोर तप और संयम के माध्यम से केवलज्ञान प्राप्त किया और अंत में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन सम्मेद शिखर से मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण इस दिन को उनका मोक्ष कल्याणक कहा जाता है।

मोक्ष कल्याणक के दिन सुबह से ही मंदिरों में मस्तकाभिषेक, शांतिधारा, शांतिपाठ और अर्घ्य अर्पण के साथ विशेष पूजन होगा। दोपहर में भगवान को 1008 निर्वाण लाडू का भोग लगाया जाएगा। यह लाडू श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु व्रत, उपवास और सामायिक रखकर दिनभर भगवान के गुणों का स्मरण करेंगे।

भगवान श्रेयांसनाथ का संदेश और उपदेश

भगवान श्रेयांसनाथ जी ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से समता, संयम और अपरिग्रह का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि में है। उनका प्रमुख संदेश था कि अहिंसा- मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न देना। सत्य और अस्तेय-जीवन में सत्य का आचरण और दूसरों के हक का सम्मान करना। ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह-इच्छाओं पर नियंत्रण और आवश्यकता से अधिक संग्रह न करना। उनकी मंगल देशना में हमेशा यह भाव रहता था कि मनुष्य अपने कर्मों से ही बंधता और मुक्त होता है। इसलिए क्रोध, मान, माया और लोभ इन चार कषायों पर विजय पाकर ही आत्मा मोक्ष की ओर बढ़ सकती है।

युवा पीढ़ी भी उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार सके

इंदौर के श्री दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि मोक्ष कल्याणक के दिन सभी मंदिरों में सामूहिक शांतिधारा, प्रभावना और धार्मिक सभाएं होंगी। इन सभाओं में भगवान के जीवन चरित्र और उनके उपदेशों पर प्रवचन दिए जाएंगे, ताकि युवा पीढ़ी भी उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार सके। समाज के श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान श्रेयांसनाथ जी के मोक्ष कल्याणक पर की गई आराधना से जीवन में शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है।