कुण्डलपुर (म.प्र.)। निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के पास अपार सामर्थ्य है। शक्ति और बुद्धि का उपयोग रचनात्मक कार्यों में किया जाए तो समाज एवं देश का निर्माण होता है, किंतु यही शक्ति गलत विचारों के हाथों में पहुंचकर विनाश का कारण बन सकती है।
उन्होंने कहा कि साधन महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि उसका उपयोग करने वाले की सोच और संस्कार महत्वपूर्ण हैं। युगादि पुरुष भगवान आदिनाथ ने प्रजा को जीवन-निर्वाह के साधन बताए और जीवन निर्माण के साथ निर्वाण का मार्ग भी दिखाया।
विचार तय करते हैं शक्ति की दिशा
मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि माचिस की तीली से दीप भी जलाया जा सकता है और आग भी लगाई जा सकती है। इसी प्रकार चाकू चिकित्सक के हाथ में जीवन बचाने का साधन बनता है, जबकि गलत हाथों में वह विनाश का कारण बन सकता है। इसलिए व्यक्ति अपनी शक्ति का उपयोग किस दिशा में करता है, यह उसके विचारों और संस्कारों पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि केवल रोटी, कपड़ा और मकान की व्यवस्था कर लेना जीवन का उद्देश्य नहीं है। मनुष्य को विवेक और विचार की विशेष क्षमता मिली है। उसे पहले अपने व्यक्तित्व का निर्माण करना चाहिए, फिर परिवार, समाज, राष्ट्र और मानवता के हित में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
अहिंसा में भी है संयम और साहस
मुनिश्री ने विमान में हुई एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि संकट की घड़ी में साहस, संयम और सूझबूझ से बड़ी दुर्घटना टाली जा सकती है। उन्होंने कहा कि अहिंसा केवल किसी पर प्रहार नहीं करने का नाम नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी संयम और विवेक बनाए रखने की शक्ति है।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति आक्रमण की नहीं, आत्मरक्षा की संस्कृति है। देश की सीमाओं, आकाश और समुद्र में तैनात जवान तथा अधिकारी देशवासियों की सुरक्षा में अपना योगदान दे रहे हैं। मनुष्य को अपनी ऊर्जा जीवों की रक्षा, समाजसेवा और रचनात्मक कार्यों में लगानी चाहिए।
सिद्धक्षेत्र की पूर्ण वंदना का आह्वान
मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि बड़े बाबा के दरबार में केवल शीघ्र दर्शन कर लौट जाना पर्याप्त नहीं है। वर्ष में कम से कम एक बार सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर की पूर्ण वंदना अवश्य करनी चाहिए। विभिन्न प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन, अभिषेक, पूजन और क्षेत्र वंदना का लाभ लेना चाहिए।
गिरनार से साइकिल यात्रा कर पहुंचे युवा
मुनिश्री ने गिरनारजी से कुण्डलपुर तक लगभग 1240 किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर पहुंचे चंदा बाबा साइकिल ग्रुप के युवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह यात्रा तीर्थभक्ति के साथ स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। साइकिल प्रदूषणमुक्त साधन है और युवाओं का यह प्रयास समाज को अपनी ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में लगाने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर मुनि श्री समतासागर जी महाराज की आहारचर्या का सौभाग्य अमरावती से पधारे पारस भैया के महाजन परिवार को प्राप्त हुआ।
सोशल मीडिया पोस्टर सार
शक्ति और बुद्धि का उपयोग सृजन में करने का संदेश।
मुनि श्री समतासागर जी ने बताया—विचार और संस्कार तय करते हैं जीवन की दिशा।
गिरनार से 1240 किमी साइकिल यात्रा कर पहुंचे युवाओं का हुआ अभिनंदन।
श्रीफल साथी : राजीव सिंघई




