कुण्डलपुर। भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव जीवन को सही दिशा देता है। जिस प्रकार पतंग की डोर उड़ाने वाले के हाथ में रहने पर पतंग सुरक्षित रहती है, उसी प्रकार जीवन की डोर देव, शास्त्र और गुरु से जुड़ी रहे तो व्यक्ति को उचित मार्गदर्शन मिलता है। यह विचार निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समतासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए।
भगवान का ज्ञान राग-द्वेष से रहित
मुनि श्री ने जिनेंद्र भगवान के ज्ञान की विशेषता समझाते हुए कहा कि सर्वज्ञ भगवान लोक-अलोक के समस्त पदार्थों को जानते हैं, किंतु किसी पदार्थ में आसक्त नहीं होते। उनका ज्ञान निर्मल और राग-द्वेष से रहित होता है।
उन्होंने कहा कि संसारी जीवों का ज्ञान अपने-पराए और परिचित-अपरिचित के भेद में उलझता है। यही भेद आगे चलकर राग-द्वेष और कर्मबंध का कारण बनता है। अरहंत भगवान ज्ञाता-दृष्टा होते हुए भी निजानंद में लीन रहते हैं।
मन को धर्म और भगवान के चिंतन में लगाएं
मुनि श्री ने कहा कि मन को किसी न किसी विषय में लगना ही है। यदि मन भगवान और धर्म के चिंतन में नहीं लगेगा तो वह धन, व्यापार और सांसारिक विषयों में उलझ जाएगा। इसलिए भगवान के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संबंध निरंतर बनाए रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान भले ही दूर हों, लेकिन उनके प्रति भावों का संबंध बना रहे तो भक्त के भीतर आनंद और आत्मविश्वास बना रहता है।
पतंग की डोर से समझाया गुरु का महत्व
पतंग और डोर का उदाहरण देते हुए मुनि श्री ने कहा कि शिष्य पतंग के समान हैं और गुरु उनके जीवन की डोर संभालने वाले हैं। जीवन को देव, शास्त्र और गुरु से जोड़े रखने पर मार्गदर्शन मिलता रहता है और साधक सही दिशा में आगे बढ़ता है।
उन्होंने पतंग उड़ाने में चाइनीज मांझे का उपयोग नहीं करने की प्रेरणा दी। कहा कि इससे पक्षियों और मनुष्यों के जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है। मनोरंजन के साथ दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। जीवन का संदेश यही है कि स्वयं जिएं और दूसरों को भी जीने दें।
दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु
धर्मसभा में विदिशा, राणापुर, बेंगलुरु, घाटोल और खरगोन सहित अनेक क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचे। मुनि श्री ने कहा कि श्रद्धा और भक्ति ही व्यक्ति को दूर-दूर से तीर्थों तक खींच लाती है।
कुण्डलपुर में 24 और 25 अक्टूबर को मुनि संघ के सान्निध्य में गुरु परंपरा समर्पण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर निबंध एवं झांकी प्रतियोगिताएं भी होंगी।
श्रीफल साथी : राजीव सिंघई





