कुचामन सिटी। डीडवाना रोड स्थित 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के अष्टम दिवस उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। प्रातः 6:30 बजे श्रावक-श्राविकाओं ने कलशाभिषेक किया। इसके बाद भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा संपन्न हुई।
आसक्ति और विकारों का त्याग ही उत्तम त्याग
उत्तम त्याग धर्म के महत्व पर बताया गया कि त्याग का अर्थ केवल धन-संपत्ति अथवा वस्तुओं को छोड़ना नहीं है। आसक्ति, मोह, लोभ, क्रोध, मान और माया जैसे आंतरिक विकारों का त्याग कर आत्मा की शुद्धि की ओर बढ़ना ही वास्तविक त्याग है।
अपनी बुरी आदतों और गलत विचारों को छोड़कर सद्गुणों को अपनाना उत्तम त्याग धर्म की सच्ची आराधना है।
बच्चों ने किया भगवान का अभिषेक
दशलक्षण पर्व पर रोनित अजमेरा, प्रियंक कासलीवाल, दीक्षित काला, दक्ष, अक्षत पहाड़िया, हेमांग, लक्ष्य पाटोदी, जेनम, अव्यंश, अनुभव, भव्य एवं सैन्य जैन सहित अन्य बच्चों ने भगवान का अभिषेक कर धर्मध्यान किया।
पद्मेश भरतपुर संगीत पार्टी के भक्ति संगीत के साथ श्रावक-श्राविकाओं ने नवदेवता पूजन, सोलहकारण पूजन, सिद्ध पूजन, दशलक्षण पूजन, दशलक्षण विधान, त्याग धर्म पूजन एवं मूलनायक भगवान महावीर पूजन किया।
शाम को हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम
सायंकाल आरती, सामायिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। महावीर पाठशाला के बच्चों ने धार्मिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। श्रद्धालुओं ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
शांतिधारा का सौभाग्य
कमला देवी-अमित-मनोज-लक्ष्य-तक्ष पाटोदी परिवार, सुशीला देवी-अशोक कुमार-गौरव काला परिवार, ललित कुमार-शुभम कुमार पाटोदी परिवार तथा जयकुमार-मुकेश कुमार पहाड़िया परिवार को शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त हुआ।




