यह उद्गार शनिवार को मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने राजीव गांधी चौराहा स्थित प्रतिभा चयन छात्रावास में प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि धर्म, धर्मात्मा और गुरुओं के प्रति समर्पण के भाव निर्जरा कराएंगे। शब्द, भाषा आपके भावों की अभिव्यक्ति है। कर्म बंध की प्रक्रिया में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। भाव ही सद्गति का साधन है। जिसके जैसे भाव होते हैं, वैसा पाप बंध होता है। इसलिए अपने भावों को संभालें।
कर्म सिद्धांत बहुत ईमानदार है - मुनि श्री आदित्य सागर जी

प्रतिक्रिया व्यक्त करेंShare your reaction
इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया चुनें।Pick your reaction to this story.
संबंधित खबरेंRelated News
संत के दो जन्म होते हैं,पहला जन्म मां देती है तो दूसरा गुरु : मुनि साध्य सागर जी का नवां दीक्षा दिवस मनाया
मल्हारगंज स्थित बीस पंथी मंदिर में चातुर्मास साधना कर रहे मुनि श्री 108 साध्य सागर जी महाराज का नवां दीक्षा दिवस मोदी जी की नसिया प्रांगण में आचार्य श्री 108 विप्रणत सागर जी महाराज के सानिध्य में भक्तिभाव से मनाया गया। इंदौर से पढ़िए, श्रीफल साथी मनमोहन झांझरी की यह रिपोर्ट...
इंदौर • Shreephal Jain News • 06-10-2026, 09:10 pm
सम्यग्दर्शन से बड़ा कोई कल्याणकारी तत्व नहीं : मिथ्यादर्शन भव-भव के भ्रमण का कारण—आचार्य उदारसागर
मुरैना के बड़े जैन मंदिर में आचार्य श्री उदारसागर जी महाराज ने सम्यग्दर्शन को मोक्षमार्ग की निर्णायक शुरुआत बताया। मुनि श्री उपशांतसागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं से क्षणिक सांसारिक सुखों के पीछे जीवन व्यर्थ न करने का आह्वान किया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
मुरैना • मनोज जैन नायक • 06-10-2026, 06:46 pm



