देहरा तिजारा, अलवर। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में चल रहे 31वें पावन चातुर्मास के अंतर्गत सोमवार को चंद्र तीर्थ मंडपम् में परम पूज्य भावलिंगी संत, राष्ट्रयोगी श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर जिनवाणी का श्रवण किया।

जिनवाणी सुनना महान पुण्य का उदय

मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन एवं प्रचार मंत्री उमंग जैन ने बताया कि आचार्य श्री ने प्रवचन में जिनवाणी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिसने जिनेंद्र भगवान की दिव्य वाणी को सुना, जिनागम का अध्ययन किया और जिनवाणी पर दृढ़ श्रद्धा रखी, वही इस धरती पर महान पुण्यात्मा है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर भगवान की वाणी अनादि-अनंत सत्य का स्वरूप है। यह प्रत्येक जीव को आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग का सच्चा पथ दिखाती है।

देशना-लब्धि से आत्मजागरण का शुभारंभ

आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने देशना-लब्धि का महत्व समझाते हुए कहा कि जब कोई जीव जिनेंद्र भगवान की वाणी को श्रद्धापूर्वक सुनता है, उसे समझता है और उसके संदेश पर मनन करता है, तब उसके भीतर आत्मजागरण का शुभारंभ होता है। जब जीव के भीतर यह भाव जागता है कि भगवान की वाणी में ही उसके कल्याण का सन्मार्ग है, जिसे वह अब तक नहीं जान पाया था, तभी से उसके सातिशय पुण्य का उदय प्रारंभ हो जाता है।

जिनवाणी को जीवन में उतारना जरूरी

आचार्य श्री ने कहा कि केवल प्रवचन सुन लेना ही पर्याप्त नहीं है। जिनवाणी को जीवन में उतारना, जिनागम का नियमित स्वाध्याय करना तथा संयम, त्याग और सदाचार को अपनाना ही वास्तविक धर्मसाधना है। जिनवाणी मनुष्य को आत्मचिंतन, विवेक और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करती है। इसलिए प्रत्येक श्रद्धालु को जिनवाणी के श्रवण के साथ उसके संदेश को अपने आचरण में उतारने का प्रयास करना चाहिए।

श्रद्धा और भक्ति से गूंजा चंद्र तीर्थ मंडपम्

प्रवचन के दौरान चंद्र तीर्थ मंडपम् श्रद्धा और भक्ति के वातावरण से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने एकाग्र भाव से आचार्य श्री के धर्मोपदेश का श्रवण किया तथा उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। ल 31वें पावन चातुर्मास के अवसर पर क्षेत्र में प्रतिदिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

समाजजनों की रही सहभागिता

इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंबू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, अनिल जैन, राकेश जैन, नवीन जैन, विजय जैन एवं संदीप जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धर्मसाधना का संदेश

धर्मसभा में आचार्य श्री ने जिनवाणी के श्रवण को जीवन के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं को जिनागम के नियमित स्वाध्याय, आत्मचिंतन, संयम, त्याग एवं सदाचार की प्रेरणा दी। उन्होंने जिनवाणी के माध्यम से आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।