एक-एक ईंट लगाते -लगाते ईमारत खड़ी हो जाती है। आचार्य ने कहा कि जीवन के अच्छे गुणों को एक सूत्र में पिरोएं तो जीवन आगम बन जाता है। जोड़ो मत, छोड़ो और जोड़ो तो बेजोड़ जोड़ो। जीवन एक किताब है। उसमें देखो कि क्या - क्या लिखा है। जो अच्छा है तो उसे प्रिंट करा लो, जिसे हर कोई पढ़ना पसंद करे। जिंदगी की इतनी अच्छी किताब बनाओ कि कितने ही लोग उससे खिताब पा करके, जीवन की किताब तैयार कर लें।
हमारे अपने पूज्य पुरुषों ने अपने जीवन में सागर में गागर भरा और महान से महान कार्य किए। हमारे तीर्थंकरों ने अपने जीवन में उस व्यकत्व को प्राप्त किया, जिसे गणधरों ने पढ़ा और गणधरों की जीवन की किताब इतनी महान थी, जिससे मुनिराजों ने किताब लिख ली और आज हम भी उनकी किताब से अपनी किताब ठीक करें। सुनो, गुनो, चुनो और अपने जीवन में अच्छा - अच्छा बुनो।
मुनि श्री ने कहा कि शरीर वियोग धर्म है, चेतन संयोग धर्म है, जीवन शोक धर्म है। लहराकर चलना यानि वक्र गति से चलना, अब ऋजु गति से चलना है। गन्ने की गांठ कोई रस नहीं देती लेकिन अगर उसको बो दो तो उसमें रस ही रस निकलता है। हम भी अपने जीवन को ऐसा बनाएं। कार्यक्रम में विशेष रूप से संघस्थ अलका दीदी, भारती दीदी के साथ समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे। यह जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा और नवीन जैन ने दी।




