मुरैना/सम्मेद शिखरजी। भगवान श्री 1008 पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी की दिव्य एवं मोक्षदायिनी धरा पर जैसवाल जैन सेवा न्यास द्वारा श्रद्धा, सेवा और वात्सल्य से परिपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर लगभग 12 हजार तीर्थयात्रियों के लिए वात्सल्य भोज के साथ मेडिकल सेवा उपलब्ध कराई गई। सेवा न्यास के मीडिया प्रभारी मनोज जैन नायक ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी सीए कमलेश जैन, सुदीप जैन मिढ़ेला वाले, रूपेश जैन दिल्ली ने न्यास की टीम के साथ श्री पार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया तथा निर्वाण लाडू अर्पित कर मोक्ष कल्याणक की आराधना की गई। इसके बाद तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने वात्सल्य भोज का लाभ लिया। तीर्थयात्रा के दौरान थकान एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे यात्रियों को मेडिकल कैंप के माध्यम से आवश्यक चिकित्सा परामर्श एवं उपचार की सुविधा भी प्रदान की गई।
सेवा तीर्थयात्रियों के प्रति वात्सल्य और करुणा व्यक्त करने का अवसर
सेवा न्यास के कार्याध्यक्ष सीए कमलेश जैन गुरुग्राम ने बताया कि सेवा केवल भोजन कराने या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं, बल्कि तीर्थयात्रियों के प्रति वात्सल्य और करुणा व्यक्त करने का अवसर है। सम्मेद शिखरजी की कठिन वंदना करने वाले श्रद्धालुओं के थके कदमों को सहारा देना और उनकी आवश्यकताओं में सहभागी बनना स्वयं में एक आध्यात्मिक अनुभव रहा।
प्रत्येक सेवा प्रभु के चरणों में समर्पित हो रही
आईपीएस पवन जैन (सेवा निवृत डी जीपी) ने कहा कि किसी तीर्थयात्री के चेहरे पर भोजन के बाद दिखाई देने वाली संतुष्टि, किसी थके हुए श्रद्धालु को मिला सेवा का सहारा और किसी अस्वस्थ यात्री को उपचार के बाद मिली राहत-यही इस सेवा आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। आयोजकों के अनुसार, तीर्थराज की पावन भूमि पर हजारों श्रद्धालुओं की सेवा करते हुए ऐसा अनुभव हुआ कि प्रत्येक तीर्थयात्री में भगवान पारसनाथ का स्वरूप विद्यमान है और प्रत्येक सेवा प्रभु के चरणों में समर्पित हो रही है।
इनकी उपस्थिति रही और किया सहयोग
सेवा न्यास के अध्यक्ष प्रदीप पीएनसी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पवन जैन डीजीपी (सेवानिवृत्त), मध्य प्रदेश की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ रवीन्द्र जैन जमुसर भोपाल, सुदीप जैन मिढ़ेला वाले, रूपेश जैन दिल्ली, अजय जैन धौलपुर, राजकुमार जैन धौलपुर, गौरव जैन इंदौर, नरेश जैन दिल्ली, प्रवीण जैन दिल्ली, मनीष जैन शिवपुरी, विपिन जैन दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों से पधारे सम्माननीय न्यासीगण एवं धर्मप्रेमी बंधुओं ने आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
प्रभु भक्ति और आत्मिक आनंद की अनुभूति हुई
न्यास से जुड़े सदस्यों ने कहा कि जहां भूखे को अन्न मिलता है, वहां केवल अन्नदान नहीं, वात्सल्य का जन्म होता है और जहां पीड़ित को उपचार मिलता है, वहां केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि करुणा प्रवाहित होती है। तीर्थयात्रियों की निस्वार्थ सेवा में उन्हें प्रभु भक्ति और आत्मिक आनंद की अनुभूति हुई। रविन्द्र जैन जमूसर ने कहा कि इस सेवा कार्य की सफलता किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि सामूहिक श्रद्धा, सहयोग, समर्पण और सेवाभाव का परिणाम है। सभी न्यासीगण, सहयोगियों और धर्मप्रेमी बंधुओं के सहयोग से यह आयोजन आत्मीय एवं अविस्मरणीय बन सका।
सेवा का सौभाग्य मिलता रहे
कार्याध्यक्ष सीए कमलेश जैन गुरुग्राम ने जैसवाल जैन सेवा न्यास ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी की पावन भूमि पर सेवा का यह अवसर सौभाग्य की बात है। न्यास ने कामना की कि सेवा का सौभाग्य मिलता रहे, वात्सल्य का भाव निरंतर बढ़ता रहे, धर्म की ज्योति प्रज्वलित रहे और भगवान पारसनाथ के चरणों में जीवन समर्पित करने की भावना सदैव बनी रहे।



