जयपुर। जनकपुरी-ज्योतिनगर स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को आचार्य श्री 108 आदित्यसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में पूजा-विधान, भक्ति एवं आराधना के विभिन्न कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव से संपन्न हुए।

शांतिधारा एवं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा

वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक पदम जैन बिलाला ने बताया कि प्रातः अभिषेक एवं विशेष शांतिधारा का आयोजन हुआ। इसका सौभाग्य विद्या-विकास-निकीता साखुनियां, सौभाग-तरुण-पंकज अजमेरा एवं महावीर-कांता पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ।

प्रथम अभिषेक अतुल पाटनी ने किया। अन्य वेदियों पर देवेन्द्र-मीना कासलीवाल, मनीष-शीला सेठी तथा अशोक-अंजू बाकलीवाल परिवार को धार्मिक क्रियाओं का सौभाग्य मिला। इसके पश्चात उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजन एवं विधान की समापन प्रक्रिया विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुई। मंडल का मुख्य कलश मंजू पाटनी परिवार ने प्राप्त किया।

वासुपूज्य भगवान का निर्वाण कल्याणक

वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर विशेष पूजन एवं निर्वाण कांड का वाचन किया गया। निर्वाण लाडू सुनीता भोंच परिवार द्वारा समर्पित किया गया। आचार्यश्री ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए।

चौबीसी विधान में 24 तीर्थंकरों की आराधना

मंदिर समिति अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश छाबड़ा ने बताया कि दोपहर में चौबीस भगवान की पूजन एवं मंडल विधान का आयोजन हुआ। इसमें भगवान आदिनाथ से भगवान महावीर तक सभी 24 तीर्थंकरों की भक्तिभाव से आराधना की गई।

प्रतिक्रमण और भक्तामर दीप अर्चना

शाम को श्रीजी की प्रतिमा को करतल ध्वनि के साथ पांडाल में ले जाकर पांडुशिला पर अनंत चतुर्दशी के कलशाभिषेक के लिए विराजमान किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने श्रीजी का अभिषेक किया। परंपरानुसार सौभाग्यशाली परिवारों को श्रीजी को माल पहनाने का अवसर मिला।

मंदिर समिति मंत्री देवेंद्र कासलीवाल ने बताया कि सभी पूजन एवं विधान श्रमण संस्कृति संस्थान की विदुषी आशिका जैन एवं अनुषी जैन ने विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराए। अनंत चतुर्दशी पर आचार्यश्री द्वारा विशेष वार्षिक प्रतिक्रमण कराया गया। इसके बाद भक्तामर पाठ की दीप अर्चना भी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ हुई।

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में प्रबंध समिति, महिला मंडल एवं युवा मंच का पूर्ण सहयोग रहा।

एक नजर में

प्रातः विशेष शांतिधारा एवं अभिषेक हुए।

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा-विधान संपन्न हुआ।

वासुपूज्य भगवान के निर्वाण कल्याणक पर निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।

चौबीसी विधान में 24 तीर्थंकरों की आराधना हुई।

वार्षिक प्रतिक्रमण एवं भक्तामर दीप अर्चना से वातावरण भक्तिमय रहा।

पोल : अनंत चतुर्दशी के अवसर पर आपको कौन-सा धार्मिक आयोजन सबसे अधिक प्रेरित करता है?

निर्वाण लाडू एवं विशेष पूजन

प्रतिक्रमण और भक्तामर अर्चना

श्रीफल साथी : पदम जैन बिलाला, जयपुर